- विनोद मिश्रा
बांदा। केन नदी की “खपटिहा बालू खदान 356/1 में केन नदी मइया का चीर हरण” हो रहा है। वह पांच माह से “वह अवैध खनन के बलात्कार औऱ दुराचार से कराह” रही हैं ? केन नदी को इस खदान के संचालक कथित “खनिज माफिया से मुक्ति” के लिये “उद्धार का इंतजार” भी मानसून सक्रिय होते ही अब समाप्त होने को है।

खपटिहा बालू खदान 356/1 में नदी की जल धारा बांध कर और पट्टा सीमा से इतर भी हो रहे अवैध खनन औऱ ओवरलोड परिवहन पर “प्रशासनिक आंच औऱ जांच के साथ सख्त कार्यवाई न होने से खनन माफिया का सीना दबंगई से 56 इंची” है ?

इसका कथित दलाल खनिज विभाग में अंगद का पैर के रूप में चर्चित है। खदान संचालक शिव मोहन तिवारी की अवैध खनन कमाई की त्रिवेणी बना है ! अपना अधिकांश समय खनिज विभाग को देकर “अवैध खनन द्वारा सरकार को चरस बोये” हुये है?इसके कथित संचालक गुप्ता खनिज विभाग औऱ प्रशासन को पांच माह से अपने इशारे पर नाचा रहा हैं ? यह पट्टा धारक क्या इतना शक्तिवान हैं की वह यहां खनन मामले में समानांतर प्रशासन चला रहा है ?

खनन नियमावली एवं पट्टा क्षेत्र से इतर हटकर खनन एवं ओवर लोड ट्रकों का यहां से हो रहा परिवहन रात में औऱ गति पकड़ लेता है। आरोप तो यहां तक है की पुलिस के जवान ओवर लोड परिहवन को बेखौफ गुजरने में सहयोग करते है! खनिज नियमावली को ठेंगा दिखा कर सरकारी राजस्व को रोजाना करोडों का चूना लगाया जा रहा है। जागो प्रशासन जागो !
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