- विनोद मिश्रा
बांदा। जिला पंचायत अध्यक्ष पद चुनाव की सरगर्मी बढ़ते ही सत्तारूढ़ दल भाजपा समेत बसपा और सपा ने अपने उम्मीदवार की जीत में गोटें बिछाना शुरू कर दी हैं।सपा अपना घोषित प्रत्याशी बदल सकती है। कृष्णा पटेल का नाम अब सामने आने की चरचा है। पार्टी के अंदर बदले समीकरणों से खेमे बाजी बढ़ सी गई है। इधर बसपा सूत्रों के अनुसार पार्टी हाई कमान जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर चुनाव न लड़ने का मन बना लिया है। वह अपना पूरा फोकस विधान सभा चुनाव पर रखेगी।ऐसे में भाजपा का पलड़ा साम-दाम दंड भेद से भारी पड़ सकता है। सामान्य नजरिये से देखा जाये तो सबसे ज्यादा 11 सदस्य जीतकर बड़ी पार्टी बनी बसपा मजबूती के साथ इस पद पर कब्जा चाहती है। वहीं सात डीडीसी सदस्य जीतने वाली भाजपा जिला पंचायत में अपना बोर्ड गठित करने का मंसूबा पाले है। हालांकि इन दोनों दलों ने उम्मीदवार घोषित नहीं किए हैं।

उधर, हाल ही में तीन निर्दलीय सदस्यों के पार्टी में शामिल होने पर सपा अध्यक्ष की कुर्सी हथियाने के लिए दम भर रही है। पार्टी हाईकमान ने महिला सदस्य रजनी यादव को अपना प्रत्याशी घोषित किया है। यह सीट पिछड़ा वर्ग के लिए सीट आरक्षित है। फिलहाल जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव की तिथि तय नहीं है। सपा को छोड़कर किसी अन्य दल ने उम्मीदवार घोषित नहीं किया है, लेकिन जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर कब्जा जमाने की होड़ शुरू हो गई है। अध्यक्ष के लिए कुल 30 जिला पंचायत सदस्यों में आधे से अधिक यानी 16 सदस्यों का बहुमत हासिल करना जरूरी है। हालांकि, यह आंकड़ा कोई पार्टी नहीं छू सका। ऐसे में अपना अध्यक्ष बनाने के लिए जोड़तोड़ की राजनीति ही सहारा है।

सबसे ज्यादा 11 सदस्य जीतने वाली बसपा निर्दलीयों पर डोरे डाल रही थी लेकिन यदि हाई कमान का नजरिया चुनाव लड़ने का नहीं है तब क्या होगा?भाजपा की निगाहें भी निर्दलीयों के साथ बागी सदस्यों पर है। पदाधिकारी जिला पंचायत में अपना बोर्ड गठित करने का दावा कर रहे, लेकिन अध्यक्ष पद प्रत्याशी को लेकर अंदरूनी खेमेबाजी से भाजपा की भी हवा है। उधर, सपा की निगाहें भी अध्यक्ष की कुर्सी पर लगी हैं। फिलहाल उसके पांच डीडीसी सदस्य निर्वाचित हुए हैं, लेकिन दावा किया जा रहा कि उनके साथ तीन निर्दलीय भी हैं। हाल ही में भाजपा छोड़कर सपा में शामिल हुए पूर्व मंत्री शिवशंकर सिंह पटेल की धर्मपत्नी कृष्णा देवी पटेल डीडीसी सदस्य हैं।वह पूर्व में भी जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुकी हैं। ऐसे में तीनों दलों में भाजपा अध्यक्ष पद को अपनी चतुर रणनीति से झटक सकती है।

जिला पंचायत सदस्यों की स्थिति पर नजर डाले तो बसपा 11, भाजपा 7, सपा 5, निर्दलीय 7 कुल 30 सीटे हैं।
बसपा जिलाध्यक्ष गुलाबसिंह वर्मा का कहना है की तीन नाम पैनल में भेजे गये हैं। प्रत्याशी का चयन हाईकमान से होगा। पर विचारणीय यह है की सूत्रों के मुताबिक यदि बसपा चुनाव मैदान से हटती है तो उसके 11 सदस्यों में बिखराव निश्चित है और प्रदेश स्तर पर सपा-बसपा में राजनीतिक रिश्ता 36का होने के कारण 99 पर्सेंट सदस्य भाजपा के पाले में जा सकते हैं। हालांकि चुनाव की तारीख घोषित होते ही उम्मीदवारो के नाम भी फाइनल हो जायेंगें। उन्हें सिर्फ पांच सदस्य और चाहिए हैं।

भाजपा में अध्यक्ष पद को प्रत्याशी चयन के लिए 13 जून को पार्टी कार्यालय में कोर ग्रुप की बैठक हुई। कमेटी की एक राय न होने पर चयनित नामों को प्रदेश संगठन को भेजे जायेगा। वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुये भाजपा का पलड़ा भारी पड़ता दिखता हैं कयोकि ज्यादातर राजनीतिक विश्लेषकों का यही मानना है। सुना तो यह भी जा रहा है की भाजपा अपना अध्यक्ष निर्विरोध ताजपोशी करा ले तो कोई आश्चर्य नहीं होगा!

( शरद मिश्रा- संपादक )
( सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश )



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