- विनोद मिश्रा
बांदा। डीएम आनंद सिंह के लिये एक चिंतनीय खबर है,वह इसलिये की जिले में मलेरिया विभाग का नरकवास जैसा हो गया है! विभाग की गजब की खामोशी तो कुछ ऐसा ही इशारा कर रही है। मच्छर से बचाव का इस विभाग की कोई उपयोगिता नहीं रह सी गई है क्योंकि अकर्मण्यता अधिकारी और कर्मचारियों पर हावी हो चुकी है। इस निठ्ठ्ले विभाग का कोई पुरसाम हाल नहीं है। वेतन के नाम पर कथित निकम्मों पर केवल सरकारी धन की बर्बादी हो रही है! मच्छरजनित रोगों की रोकथाम को मानसून से पहले मलेरिया विभाग कागजी आकड़ों पर एक बार फिर सक्रिय हो गया है।

शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में मलेरिया रोधी अभियान महज कागजों में शुरू हो गया है। पात्रों में जमे पानी में पैदा मच्छरों के लार्वा फल-फूल रहे हैं।नष्ट नहीं किए जा रहे। औऱ न ही उन टीमों का कहीं अता पता हैं जो मलेरिया सहित डेंगू व फाइलेरिया रोगों से बचाव के तरीके बतायें। जबकि इसके लिये तीस जून तक विशेष अभियान चलना था। हर रविवार को मच्छरों पर वार कार्यक्रम भी बना। कागजी आकड़ों में घर बैठे छह माह में 8936 नमूनों में 9 मलेरिया पॉजिटिव केस मिलना दर्शाया गया है। कोरोना संक्रमण की रफ्तार थमने के बाद अब बारिश के मौसम में मलेरिया, डेंगू व फाइलेरिया आदि रोगों का खतरा मंडराने लगा है।

कोविड सर्वे के साथ-साथ मच्छरजनित रोगों पर रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग,मलेरिया विभाग को धरातल पर अभियान चलाना चाहिये। लेकिन सब हवा-हवाई है! इसके इतर जिला मलेरिया अधिकारी पूजा अहिरवार का दावा है कि अभियान में आशा कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी और एएनएम आदि को लगाया गया है।

रोजाना टीमें गांवों में भ्रमण कर लोगों को मच्छरजनित रोगों के प्रति जागरूक कर रही हैं। वॉल पेंटिंग भी कराई जा रही है। जलभराव वाले स्थानों पर दवा छिड़काव किया जा रहा है।हर रविवार को मच्छर पर वार कार्यक्रम के तहत लोगों को घर व आसपास सफाई के प्रति प्रेरित किया जाएगा। बुखार से ग्रसित मरीजों को जांच की सलाह दी जा रही है। मलेरिया रोगियों के नि:शुल्क इलाज की व्यवस्था है। जनवरी से अब तक जनपद में 8926 संदिग्धों के खून की जांच की गई। इनमें नौ मलेरिया के केस मिले हैं।

कूलर और पानी की टंकी को सप्ताह में दो बार साफ करें, कूलर के पानी में लार्वा नष्ट करने के लिए थोड़ा पेट्रोल डाल दें, रोजाना घड़े को साफ करने के बाद पानी भरें, बुखार होने पर खून की जांच कराएं, डेंगू की पुष्टि होने पर योग्य चिकित्सक से इलाज कराएं, घर या दफ्तर के आसपास जलभराव न होने दें।गजब का कुर्सी पर बैठे-बैठे सक्रियता का पहाड़ा पढ़ाया जा रहा है !

डीएम आनंद कुमार सिंह से उम्मीद है कि वह मलेरिया विभाग के नकारेपन को अवश्य संज्ञान में लेंगे । साथ ही स्थलीय जांच कराकर विभागीय समीक्षा भी करेंगे । तभी नकारेपन में सोया यह विभाग अपने कर्तव्यों के प्रति सचेत होगा ।

( शरद मिश्रा- संपादक )
( सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश )



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