- विनोद मिश्रा
बांदा। पूर्वांचल का माफिया डॉन और विधायक मुख्तार अंसारी अब बांदा जेल में योगी सरकार से आंख-मिचौनी खेल रहा है। कथित तौर पर सरकार की सारी सख्ती और निगरानी उसकी मेहर बानी पर नाचतीं है। आश्चर्य की बात यह कही जा रही है कि मंडल कारागार प्रशासन इस खुफिया चालाकी से जिलाधिकारी आनंद सिंह को भी अंधेरे में रखे हुये है।

इस सारे खेला के पीछे “धन लक्ष्मी” का हाथ है! इसके चलते सारी सख्ती को धता बता कर यूपी का माफिया डान यहां के मंडल कारगार में बैरक नंबर 16 में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर कूट रचित चाल से सुख सुविधओं से तृप्त है। इससे पहले मुख्तार अंसारी एक मामले में पंजाब की रोपड़ जेल में बंद था. जबकि उसे यूपी लाने के लिए योगी सरकार और पंजाब सरकार के बीच सुप्रीम कोर्ट तक मामला चला. 26 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए मुख्तार अंसारी को उत्तर प्रदेश भेजने का आदेश दिया था.

मुख्तार अंसारी की वजह से बांदा जेल एक बार चर्चा में आ चुकी है. हालांकि यह जेल हमेशा से सुर्खियों में रही है. कभी अनिल दुजाना के सूटर, कभी दस्यु सरगना बलखड़िया, तो कभी ददुआ के गुर्गे बांदा जेल में बंद रहे हैं. हमेशा से बांदा जेल वीवीआईपी गुंडों के नाम से जानी गई है. यही नहीं, इस जेल में यूपी के जेल मंत्री तक लंबे समय तक बंद रहे हैं. अब यूपी के माफिया डॉन मुख्तार अंसारी को एक बार फिर इसी जेल में रखा गया है.

यूपी के बांदा जेल में पहले से बहुत सारी सुख सुविधाएं गुंडों या फिर दबंगों को मिलनें के लिये मसहूर रही है। योगी सरकार आने के बाद से सारे गुंडे माफियाओं की हालत खराब हो गई . यही नहीं, सारी सुख सुविधाएं बंद हो गई . लेकिन एक बार फिर बांदा के इसी मंडल कारागार में यूपी के सबसे बड़े डॉन बाहुबली विधायक माफिया मुख्तार अंसारी को शिफ्ट किया गया . औऱ जेल के सूत्रों के अनुसार उसने अपनी रणनीति के तहत सारी सारी आराम दाई व्यवस्था फिट कर ली है ? सीसीटीवी कैमरे और सीधे लखनऊ से निगरानी कथित बेमानी बन चुकी है !

सूत्रों के अनुसार इसके लिए पहले की तुलना में उसका बजट आनुपातिक तौर पर कई गुना बढ़ गया है। जेल रणनीति के तहत मीडिया को भी अधेरे में रखकर डान पर सख्त सख्ती का भ्रम जाल प्रचारित कराया गया ! उसकी मुश्किलों में रहने की कहानी महाभारत के अश्वथामा के झूठे वध की तरह शंखनाद में दवा दी गई ! डान के नजदीकी दर्जनों यहां और लखनऊ के अच्छे होटलों में डेरा डाले व्यवस्था की बागडोर संभाले हैं! कथित तौर पर प्रशासन जानबूझ कर “धृतराष्ट ” की भूमिका में हैं ? जो जांच का विषय हैं ! उम्मीद भी है कि आयुक्त दिनेश सिंह और जिलाधिकारी आनंद सिंह माफिया डान को “आनंद” में नहीं रहने देंगे। जेल औऱ खुफिया तंत्र को कसेंगे। तह की असलियत क्या हैं उसका भेदन कर वास्तविक सच्चाई को पर्दे में नहीं रहने देंगे ! हालांकि जेलर प्रमोद तिवारी हमारे इस खुलासे से चौंकते अवश्य हैं पर ऐसे किसी इत्तिफाक से इंकार करते हैं।

( शरद मिश्रा- संपादक )
( सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश )



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