
- शरद मिश्रा
बांदा। राशन में “फर्जीवाड़े पर लगाम” और पात्र उपभोक्ताओं की “सही पहचान” के लिए शुरू हुई ई-केवाईसी की मुहिम दो साल बाद भी पूरी नहीं हो सकी है। शासन ने जून 2024 में महज तीन माह के लिए शुरू की गई प्रक्रिया को कई बार आगे बढ़ाया, लेकिन इसके बावजूद करीब छह फीसदी “राशनकार्ड सदस्य” अभी भी ई-केवाईसी से “बाहर” हैं।
अब पूर्ति विभाग ने बचे हुए उपभोक्ताओं तक पहुंचने के लिए कोटेदारों को “घर-घर” दस्तक देने का “फरमान” दिया है। लक्ष्य साफ है कोई पात्र सदस्य ई-केवाईसी से छूट न जाए और प्रक्रिया को शत-प्रतिशत पूरा कराया जाए। तहसील क्षेत्र के 108 गांव और कस्बों में 133 कोटेदार सरकारी राशन की दुकानें संचालित कर रहे हैं। इन दुकानों से करीब 1.14 लाख राशनकार्ड जुड़े हैं, जिनमें लगभग 4.16 लाख सदस्य दर्ज हैं।
विभागीय आंकड़ों के मुताबिक करीब 94 फीसदी सदस्यों की ई-केवाईसी पूरी हो चुकी है। वहीं लगभग छह फीसदी सदस्य अभी “सत्यापन की प्रक्रिया से बाहर” हैं। यानी हजारों उपभोक्ताओं का आधार सत्यापन अभी बाकी है। ई-केवाईसी प्रक्रिया “एक जून 2024 से तीन माह के लिए शुरू” की गई थी। निर्धारित अवधि में शत-प्रतिशत सत्यापन नहीं होने पर इसकी समय सीमा को कई बार “तीन-तीन माह के लिए बढ़ाया” गया। “समय बढ़ता गया, अभियान चलते रहे,लेकिन लक्ष्य अब तक पूरा नहीं” हो पाया।
ऐसे में पूर्ति विभाग के सामने बचे हुए “सदस्यों की ई-केवाईसी जल्द पूरी कराने की चुनौती” है। पूर्ति निरीक्षक अजीत सिंह यादव के मुताबिक कोटेदारों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि “सुबह से दोपहर एक बजे तक राशन वितरण” किया जाए और इसके बाद ई-केवाईसी का “काम” कराया जाए। “विभाग का जोर अब सिर्फ दुकान पर आने वाले उपभोक्ताओं पर नहीं,बल्कि छूटे हुए सदस्यों तक पहुंचने” पर है।
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