
- विनोद मिश्रा
लखनऊ। विधानसभा चुनाव 2027 से पहले भाजपा के आंतरिक सर्वे ने पार्टी के लिए चेतावनी की घंटी बजा दी है। चार महीने तक चले सर्वे में सामने आया है कि मौजूदा 100 विधायकों के टिकट खतरे में हैं और 67 सीटें कमजोर स्थिति में हैं। सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों में से भाजपा को इस बार 190 से 205 सीटें ही मिलती दिख रही हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर “एंटी इनकंबेंसी पर काबू नहीं” पाया गया तो “पार्टी को 2022 के मुकाबले 52 से 67 सीटों का नुकसान” हो सकता है। सर्वे का सबसे अहम निष्कर्ष यह है कि जनता में सरकार के कामों की तुलना में स्थानीय विधायकों के खिलाफ “ज्यादा नाराजगी” है। इसी वजह से “करीब 100 विधायकों के टिकट काटने की सिफारिश” की गई है। पार्टी अब उम्मीदवारों के चयन में “जीतने की क्षमता को सबसे बड़ा पैमाना” बनाएगी।
रिपोर्ट में बुंदेलखंड, पूर्वांचल को सबसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्र बताया गया है। चित्रकूट, आजमगढ़, मऊ, जौनपुर, गाजीपुर और मिर्जापुर मंडल में “एंटी इनकंबेंसी सबसे ज्यादा” है। यहां “संगठन और संघ की मदद से विशेष रणनीति” बनाकर काम किया जाएगा। सर्वे में युवाओं में रोजगार, पेपर लीक, महंगाई और नई नीतियों को लेकर “असंतोष दर्ज” किया गया है। इसके अलावा “राम मंदिर, नोटबंदी, ई-20 और एथेनॉल नीति “जैसे मुद्दे भी जनता के बीच चर्चा में हैं।
जानकारी के मुताबिक “पार्टी के संगठनात्मक सर्वे के साथ-साथ सीएम स्तर पर भी एक स्वतंत्र एजेंसी से सर्वे” कराया गया है। “दोनों रिपोर्टों के आधार” पर ही “टिकट वितरण, संगठन में बदलाव और चुनावी रणनीति” का “अंतिम फैसला” लिया जाएगा। “राजनीतिक जानकारों का मानना” है कि “सर्वे के नतीजे” आने के बाद अब भाजपा “चेहरा बदलो” फॉर्मूले पर काम कर सकती है।
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