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October 11, 2026
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चबूतरा युद्ध: प्रशासन और व्यापारियों के बीच हुआ महासंग्राम, गल्ला मंडी बनी 'रणभूमि' !
उत्तर प्रदेशबुंदेलखंड

चबूतरा युद्ध: प्रशासन और व्यापारियों के बीच हुआ महासंग्राम, गल्ला मंडी बनी ‘रणभूमि’ !

विनोद मिश्रा डायरेक्टर सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश

  • विनोद मिश्रा

बांदा। जिलें की गल्ला मंडी इन दिनों ‘सब्जियों से ज्यादा चबूतरों’ की ‘जंग’ को लेकर ‘सुर्खियों’ में है। ‘वर्षों से चले आ रहे कब्जों और आवंटन विवाद’ ने अब खुली ‘टकराहट’ का रूप ले लिया है। एक ओर प्रशासन का दावा है कि छोटे सब्जी व्यापारियों को न्याय दिलाने के लिए कार्रवाई की जा रही है, तो दूसरी ओर व्यापारी इसे चुनिंदा लोगों के दबाव में की जा रही कार्रवाई बता रहे हैं। चबूतरों को लेकर शुरू हुआ विवाद अब मंडी की सबसे बड़ी लड़ाई बन गया है।

चबूतरा युद्ध: प्रशासन और व्यापारियों के बीच हुआ महासंग्राम, गल्ला मंडी बनी 'रणभूमि' !मंडी परिसर में लंबे समय से कुछ व्यापारियों द्वारा अधिक स्थान घेरकर दुकानें लगाए जाने की शिकायतें सामने आ रही थीं। इसके बाद सिटी मजिस्ट्रेट के निर्देश पर चबूतरों का पुनः आवंटन और अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई। कार्रवाई की जानकारी मिलते ही सब्जी व्यापारी भड़क उठे और मंडी परिसर में जमकर हंगामा हुआ।

चबूतरा युद्ध: प्रशासन और व्यापारियों के बीच हुआ महासंग्राम, गल्ला मंडी बनी 'रणभूमि' !कुछ समय के लिए मंडी का माहौल पूरी तरह तनावपूर्ण हो गया। सिटी मजिस्ट्रेट संदीप केला का कहना है कि सड़क किनारे और बारिश में खुले आसमान के नीचे सब्जी बेचने को मजबूर छोटे व्यापारियों को भी समान अवसर मिलना चाहिए।

चबूतरा युद्ध: प्रशासन और व्यापारियों के बीच हुआ महासंग्राम, गल्ला मंडी बनी 'रणभूमि' !उनके अनुसार कई व्यापारी जरूरत से कहीं अधिक जगह घेरे हुए हैं, इसलिए अब सभी को बराबर स्थान देने के उद्देश्य से व्यवस्था बनाई जा रही है। वहीं दूसरी ओर सब्जी व्यापारियों का आरोप है कि कार्रवाई निष्पक्ष नहीं है। उनका कहना है कि कुछ प्रभावशाली व्यापारियों के इशारे पर प्रशासन दबाव बनाकर उन्हें हटाना चाहता है।

चबूतरा युद्ध: प्रशासन और व्यापारियों के बीच हुआ महासंग्राम, गल्ला मंडी बनी 'रणभूमि' ! व्यापारियों का दावा है कि वे वर्षों से उन्हीं चबूतरों पर दुकान लगाते आ रहे हैं, लेकिन आज तक उन्हें स्थायी रूप से स्थान आवंटित नहीं किया गया। उनका सवाल है कि यदि वे अवैध थे तो इतने वर्षों तक प्रशासन मौन क्यों रहा, और यदि वे वैध हैं तो अब अचानक कार्रवाई क्यों की जा रही है।

 
 



Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh
 





 

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