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नरैनी में 'वीरेंद्र साक्षी की लहर': जिस दल से उतरे उसी की 'चुनावी नैया पार' !
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नरैनी में ‘वीरेंद्र साक्षी की लहर’: जिस दल से उतरे उसी की ‘चुनावी नैया पार’ !

विनोद मिश्रा डायरेक्टर सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश

  • विनोद मिश्रा

बांदा। विधानसभा चुनाव की ‘आहट’ के साथ ‘नरैनी की सियासत’ में ‘सबसे ज्यादा चर्चा एक ही नाम’ की है ‘वीरेंद्र साक्षी’। क्षेत्र की चौपालों औऱ जिले के सियासी गलियारों तक यही सवाल गूंज रहा है कि साक्षी मैदान में कब उतरेंगे और किस दल के सिंबल से उतरेंगे। वीरेंद्र साक्षी ने नरैनी को अपनी ‘कर्मभूमि’ कई वर्ष पूर्व बना लिया था। उनका सियासी सफर कांग्रेस से शुरू हुआ और आज वे रालोद के प्रदेश महासचिव हैं। इसके साथ ही वे खटिक महासंघ के प्रदेश महासचिव और भारतीय उद्योग व्यापार मंडल बांदा के संरक्षक की जिम्मेदारी भी निभा रहे हैं। लेकिन इन पदों से बड़ी पहचान उनकी समाजसेवा और जनसेवक वाली छवि है।

नरैनी में 'वीरेंद्र साक्षी की लहर': जिस दल से उतरे उसी की 'चुनावी नैया पार' ! साक्षी हर मौके पर बिना भेदभाव लोगों के साथ खड़े नजर आते हैं। इसी वजह से आज नरैनी में उनकी ‘लोकप्रियता का ग्राफ सभी नेताओं से ऊपर’ माना जा रहा है। जनता खुद कह रही है कि जमीनी कनेक्ट के मामले में साक्षी का कोई तोड़ नहीं है। इसी लोकप्रियता की वजह से सपा और कांग्रेस दोनों की निगाहें साक्षी पर टिकी मानी जा रहीं हैं। क्षेत्र में चर्चा है कि अगर वीरेंद्र साक्षी सपा या कांग्रेस के टिकट से चुनाव लड़ते हैं तो भाजपा के लिए नरैनी में राह ‘आसमान से तारे’ तोड़ने जैसी हो जायेगी? उनका जनाधार और सामाजिक समीकरण सीधे भाजपा के वोटबैंक को प्रभावित कर सकते हैं। वहीं राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर साक्षी चुनाव से बाहर रहे तो नरैनी में भाजपा की जीत की राह ‘निष्कंटक’ हो जाएगी।

नरैनी में 'वीरेंद्र साक्षी की लहर': जिस दल से उतरे उसी की 'चुनावी नैया पार' ! फिलहाल साक्षी इन सभी सवालों को ‘हंसी में टाल’ देते हैं। ‘न हां करते हैं औऱ नतो ना करते’ हैं। लेकिन अंदरखाने यह तय माना जा रहा है कि वे कोई न कोई ‘सियासी गुल’ जरूर खिलाएंगे। रालोद में प्रदेश महासचिव होने के नाते उनके पास विकल्प खुले हैं और सपा-कांग्रेस गठबंधन की चर्चा के बीच वहां भी उनके लिए संभावनाएं बन रही हैं। नरैनी का चुनाव अब धीरे-धीरे व्यक्ति केंद्रित होता जा रहा है। मुद्दे बाद में, पहले चेहरा और वह चेहरा है वीरेंद्र साक्षी। जिस दल ने साक्षी को साध लिया उसने नरैनी की आधी ‘जंग जीत’ ली। अब ‘गेंद कांग्रेस औऱ सपा के पाले’ में है और पूरा क्षेत्र इन दलों के ‘हाई कमान’ औऱ वीरेंद्र साक्षी के ‘फैसले का इंतजार’ कर रहा है!

 
 



Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh
 





 

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