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करोड़ों का 'ऑक्सीजन प्लांट' हुआ बेदम: मरीजों की 'जिंदगी' भगवान भरोसे, कब जागेगा विभाग !
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करोड़ों का ‘ऑक्सीजन प्लांट’ हुआ बेदम: मरीजों की ‘जिंदगी’ भगवान भरोसे, कब जागेगा विभाग !

विनोद मिश्रा डायरेक्टर सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश

  • विनोद मिश्रा

बांदा। जिस ऑक्सीजन प्लांट ने कोरोना महामारी के दौरान हजारों मरीजों की सांसों की डोर थामे रखी थी, आज उसी प्लांट की अपनी ही “सांसें” थम गई हैं। करोड़ों रुपये की लागत से जिला अस्पताल में स्थापित ऑक्सीजन प्लांट लंबे समय से बंद पड़ा है और अस्पताल की पूरी ऑक्सीजन व्यवस्था अब केवल सिलिंडरों के भरोसे चल रही है। सवाल यह है कि यदि किसी दिन सिलिंडरों की आपूर्ति रुक गई तो क्या जिला अस्पताल गंभीर मरीजों को बचा पाएगा?

करोड़ों का 'ऑक्सीजन प्लांट' हुआ बेदम: मरीजों की 'जिंदगी' भगवान भरोसे, कब जागेगा विभाग !यह स्थिति केवल तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था की तैयारी और रखरखाव पर गंभीर सवाल खड़े करती है। जिस व्यवस्था को आपातकालीन सुरक्षा कवच माना गया था, वही आज निष्क्रिय है और मरीजों की जिंदगी वैकल्पिक इंतजामों पर टिकी हुई है। कोविड महामारी के दौरान सरकार ने करोड़ों रुपये खर्च कर जिला अस्पताल में आधुनिक ऑक्सीजन प्लांट स्थापित कराया था ताकि भविष्य में ऑक्सीजन संकट दोबारा पैदा न हो। उस समय इसे स्वास्थ्य व्यवस्था की बड़ी उपलब्धि बताया गया था।

करोड़ों का 'ऑक्सीजन प्लांट' हुआ बेदम: मरीजों की 'जिंदगी' भगवान भरोसे, कब जागेगा विभाग !लेकिन आज वही प्लांट बंद पड़ा है। अस्पताल प्रशासन बाहरी एजेंसियों से ऑक्सीजन सिलिंडर मंगाकर किसी तरह व्यवस्था चला रहा है। यह न केवल अतिरिक्त आर्थिक बोझ है, बल्कि आपूर्ति बाधित होने का स्थायी खतरा भी बना हुआ है। जिला अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में प्रतिदिन औसतन तीन ऑक्सीजन सिलिंडरों की आवश्यकता पड़ रही है। गंभीर मरीजों, दुर्घटना पीड़ितों और सांस संबंधी बीमारियों से जूझ रहे लोगों का उपचार इन्हीं सिलिंडरों के सहारे किया जा रहा है। ऐसे समय में यदि सिलिंडर आपूर्ति में जरा भी बाधा आई तो अस्पताल की पूरी व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

स्वास्थ्य व्यवस्था की 'शर्मनाक हकीकत' : डॉक्टर और दलालों द्वारा मरीजों का आर्थिक शोषणजिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. किशुन कुमार के अनुसार प्लांट को ठीक कराने के लिए शासन को पत्र भेजा गया है और आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। लेकिन बड़ा प्रश्न यह है कि यदि प्लांट लंबे समय से खराब था, तो उसकी समय रहते मरम्मत क्यों नहीं कराई गई? करोड़ों रुपये की सार्वजनिक संपत्ति रखरखाव के अभाव में बंद कैसे हो गई?

 
 



Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh
 





 

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