
- शरद मिश्रा
बांदा। सरकारी कागजों में जमीन का मालिकाना हक मिलने के बावजूद जब वर्षों तक वास्तविक कब्जा न मिले तो व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। बांदा जिले में दर्जनभर पट्टाधारकों का दर्द अब आक्रोश में बदलता दिखाई दे रहा है। उनका आरोप है कि प्रशासन की उदासीनता के कारण आवासीय पट्टों का सीमांकन नहीं हो रहा है और यही लापरवाही भविष्य में बड़े विवाद की वजह बन सकती है।
मुख्यमंत्री के नाम सौंपे गए ज्ञापन में पट्टाधारकों ने साफ कहा है कि यदि समय रहते सीमांकन और कब्जा नहीं दिलाया गया तो किसी भी समय दो पक्ष आमने-सामने आ सकते हैं और हालात खूनी संघर्ष तक पहुंच सकते हैं। पट्टाधारकों का कहना है कि उन्हें शासन की ओर से आवासीय पट्टे तो आवंटित कर दिए गए, लेकिन आज तक जमीन का सीमांकन और पैमाइश नहीं कराई गई। नतीजा यह है कि जमीन की वास्तविक सीमा स्पष्ट न होने से आए दिन विवाद की स्थिति बनती रहती है। कई बार राजस्व अधिकारियों और प्रशासन से शिकायत करने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
उनका आरोप है कि वर्षों से वे सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन समस्या ‘जस की तस’ बनी हुई है। मुख्यमंत्री के नाम दिए गए ज्ञापन में पट्टाधारकों ने मांग की है कि पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम गठित कर पर्याप्त पुलिस बल की मौजूदगी में सभी आवासीय पट्टों का सीमांकन कराया जाए। प्रत्येक पट्टाधारक की भूमि का स्पष्ट चिन्हांकन कर उसे मौके पर कब्जा दिलाया जाए, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार का विवाद न हो और लोगों को अपने अधिकार के लिए भटकना न पड़े। पट्टाधारकों ने यह भी कहा कि यदि प्रशासन ने अब भी गंभीरता नहीं दिखाई तो कानून-व्यवस्था की स्थिति प्रभावित हो सकती है। उनका कहना है कि शासन ने उन्हें पट्टे दिए हैं, इसलिए अब प्रशासन की जिम्मेदारी है कि उन्हें उनकी आवंटित भूमि पर शांतिपूर्वक कब्जा भी दिलाए।
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