
- विनोद मिश्रा
चित्रकूट। चित्रकूट की बहुचर्चित कर्वी विशिष्ट मंडी निर्माण परियोजना अब केवल एक निर्माण कार्य नहीं, बल्कि कथित करोड़ों के भ्रष्टाचार की ऐसी कहानी बन गई है, जिसकी परतें खुलने के साथ कई बड़े सवाल सामने आ रहे हैं। करीब आठ करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों की जांच में अब आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (ईओडब्ल्यू) ने दो तत्कालीन अधिकारियों को गिरफ्तार कर लिया है। कार्रवाई ने प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। सबसे बड़ा प्रश्न अब यह है कि क्या यह खेल केवल दो अधिकारियों तक सीमित था, या इसके पीछे फैसले लेने वाली पूरी श्रृंखला की भी जांच होगी?
बुंदेलखंड विकास निधि से वर्ष 2014 में कर्वी विशिष्ट मंडी परियोजना को मंजूरी मिली। उस समय केंद्र में कांग्रेस और उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार थी। निर्माण का ठेका मेसर्स ग्लेयर इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड, गाजियाबाद को दिया गया। लेकिन निर्माण शुरू होते ही गुणवत्ता, भुगतान और कार्यप्रणाली को लेकर शिकायतों का सिलसिला शुरू हो गया। लखनऊ मंडी निदेशालय की जांच के बाद ठेकेदार कंपनी को दो बार ब्लैकलिस्ट किया गया और नया टेंडर जारी करना पड़ा। इससे यह स्पष्ट हुआ कि परियोजना को लेकर गंभीर आपत्तियां दर्ज हुई थीं।
इसके बाद भाजपा सरकार के दौरान वर्ष 2019 में तत्कालीन मंडी सचिव डीपी सिंह की रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन डीडीसी लालचंद्र सिंह ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कराया। विवेचना बाद में ईओडब्ल्यू को सौंप दी गई। लंबी जांच के बाद ईओडब्ल्यू ने दो तत्कालीन अधिकारियों को गिरफ्तार कर लिया है। यह कार्रवाई संकेत देती है कि जांच एजेंसी मामले को गंभीरता से आगे बढ़ा रही है। अब निगाह इस पर है कि क्या जांच केवल इन्हीं गिरफ्तारियों तक सीमित रहेगी या फाइलों पर हस्ताक्षर करने वाले, गुणवत्ता की निगरानी करने वाले और भुगतान प्रक्रिया से जुड़े अन्य जिम्मेदारों की भूमिका भी जांची जाएगी।
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