City News Uttar Pradesh
बुंदेलखंड के 'सूखे की दरारों' में दबी जिंदगियां: बांदा की कार्यशाला में उठी उम्मीद की आवाज
उत्तर प्रदेशबुंदेलखंड

बुंदेलखंड के ‘सूखे की दरारों’ में दबी जिंदगियां: बांदा की कार्यशाला में उठी उम्मीद की आवाज

विनोद मिश्रा डायरेक्टर सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश

  • विनोद मिश्रा

बांदा। जहां जमीन की छाती फट जाती है, तालाबों की आंखें सूख जाती हैं और बादलों के इंतजार में पीढ़ियां बीत जाती हैं उस बुंदेलखंड के दर्द को आवाज देने के लिए अतर्रा में एक राज्य स्तरीय कार्यशाला की गई। विद्या धाम समिति के बैनर तले जुटी इस कार्यशाला में सिर्फ भाषण नहीं हुए,बल्कि सूखे की आग में झुलसते बुंदेलखंड के हर गांव, हर खेत और हर प्यासे कंठ की पीड़ा को महसूस किया गया।

बुंदेलखंड के 'सूखे की दरारों' में दबी जिंदगियां: बांदा की कार्यशाला में उठी उम्मीद की आवाजप्रख्यात पत्रकार भारत डोगरा ने कहा कि यहां सूखा सिर्फ मौसम की मार नहीं है, यह एक सामाजिक त्रासदी है जो हर साल किसान का सपना, मां की थाली और बच्चे का भविष्य छीन ले जाती है। वरिष्ठ चिंतक अरविंद मूर्ति ने याद दिलाया कि कभी जल-जंगल-जमीन से समृद्ध यह धरती आज बूंद-बूंद को तरस रही है। उच्च न्यायालय के अधिवक्ता संतोष ने चेताया कि अगर अब भी नहीं चेते तो अगली पीढ़ी हमें माफ नहीं करेगी।

बुंदेलखंड के 'सूखे की दरारों' में दबी जिंदगियां: बांदा की कार्यशाला में उठी उम्मीद की आवाजसामाजिक कार्यकर्ता ब्रजभूषण यादव, विजय बहादुर प्रधान और संघर्षशील साथी मतादयाल ने जोर दिया कि सरकारी फाइलों से निकलकर समाधान अब जमीन पर दिखना चाहिए। विद्याधाम समिति के सचिव राजा भइया का सारगर्भित कथन नें कार्यक्रम का ‘निचोड़’ पेश किया। कहा कि जलवायु परिवर्तन की मार सबसे पहले बुंदेलखंड जैसे इलाकों पर ही पड़ती है। यहां की सूखी नदियां, उजड़े खेत और पलायन को मजबूर परिवार किसी आंकड़े से बड़े हैं यह इंसानी हादसे हैं।

बुंदेलखंड के 'सूखे की दरारों' में दबी जिंदगियां: बांदा की कार्यशाला में उठी उम्मीद की आवाजवक्ताओं ने एक सुर में कहा कि अब सिर्फ बैठकें नहीं, बांध टूटने से पहले बंधान चाहिए। तालाब, मेड़बंदी, पारंपरिक जल स्रोतों का जीर्णोद्धार और हर बूंद को सहेजने की जिद चाहिए। कार्यक्रम के अंत में सभी की आंखों में एक ही संकल्प था बुंदेलखंड को उसकी प्यास से आजाद कराना है। प्रतिभागियों ने हाथ उठाकर वादा किया कि वे जल, जंगल और जमीन को बचाने की लड़ाई गांव-गांव तक ले जाएंगे। क्योंकि सूखा अगर नियति नहीं,तो समाधान भी सामूहिक जिम्मेदारी है।

 
 



Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh
 





 

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh
 
Subscribe to us on Youtube to watch the latest video news updates.

Notice: This report has been updated by City News Uttar Pradesh Desk, . Full responsibility for the content of this report rests with City News Uttar Pradesh Desk. Neither www.citynewsuttarpradesh.in nor the Editorial Board bears any responsibility.

Related News

विधायक प्रकाश द्वारा ‘दंगल’ का उद्घाटन: कहा- शारीरिक व मानसिक ताकत का ‘संगम’

हाथरस जा सकते हैं राहुल गांधी : भगदड़ में घायल पीड़ितों से करेंगे मुलाकात, बांटेंगे दुख-दर्द

यूपी के मंत्री रामकेश नें एमपी में फूंका चुनावी बिगुल: चंदला विधानसभा में सघन जनसंपर्क

City News Uttar Pradesh

दबंगों ने दारोगा पर कर दिया हमला: जान बचाकर भागी वन विभाग की टीम

City News Uttar Pradesh

अंकित गुप्ता ने सफाई अभियान को दी रफ्तार: बांदा में “डे-नाइट” सफाई व्यवस्था लागू

दो लाख से अधिक रकम पर पैनी नजर : जब्त हो जाने पर ठन -ठन गोपाल

ब्रेकिंग न्यूज़