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बांदा में अब 'सैटेलाइट' से खोजा जायेगा 'गर्मी' का गुनाहगार: सूरज का होगा सर्जिकल स्ट्राइक
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बांदा में अब ‘सैटेलाइट’ से खोजा जायेगा ‘गर्मी’ का गुनाहगार: सूरज का होगा सर्जिकल स्ट्राइक

विनोद मिश्रा डायरेक्टर सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश

  • विनोद मिश्रा

बांदा। बुंदेलखंड की तपती जमीन पर सूरज इन दिनों ‘बुलडोजर मोड’ में है। पारा 48 डिग्री भी पार कर चुका है। सड़कों पर तारकोल नहीं, लोगों के जूते पिघल रहे हैं। अब शासन ने भी मान लिया कि बांदा की गर्मी ‘सिर्फ मौसम’ नहीं, ‘मामला गंभीर’ है। डीएम अमित आसेरी के अनुरोध पर लखनऊ से छह वैज्ञानिकों की फौज उतार दी गई है। यह लोग अब रिमोट सेंसिंग, उपग्रह तस्वीरें और डेटा का ‘एक्स-रे’ करके पता लगाएंगे कि आखिर बांदा में लू और हीट वेव ‘स्पेशल ट्रीटमेंट’ क्यों देती है।

बांदा में अब 'सैटेलाइट' से खोजा जायेगा 'गर्मी' का गुनाहगार: सूरज का होगा सर्जिकल स्ट्राइकवैज्ञानिकों की टीम अब जिले की गली-गली नापेगी,पर पैरों से नहीं, सैटेलाइट से। सबसे पहले ‘लैंड सरफेस टेम्परेचर’ यानी जमीन की सतह का बुखार नापा जाएगा। उपग्रह बताएगा कि बांदा का कौन सा कोना ‘तंदूर’ बना हुआ है और कहां मिट्टी ‘तवा’ बनकर रोटी सेक रही है। इसके बाद हरियाली का हिसाब होगा। टीम देखेगी कि पेड़ कितने बचे हैं और कितने ‘विकास की भेंट’ चढ़ गए। क्योंकि जब जंगल कटेंगे तो एसी भी हांफने लगेगा,यह विज्ञान कहता है।

बांदा में अब 'सैटेलाइट' से खोजा जायेगा 'गर्मी' का गुनाहगार: सूरज का होगा सर्जिकल स्ट्राइकअध्ययन का अगला चैप्टर पानी पर है। तालाब सूखे,नदियां पतली और भूजल नीचे। यह तीनों मिलकर गर्मी को ‘एक्स्ट्रा बूस्टर डोज’ दे रहे हैं। वैज्ञानिक नमी का नक्शा बनाएंगे कि कहां-कहां जमीन ‘डिहाइड्रेशन’ की शिकार है। साथ ही बुंदेलखंड की चट्टानी जमीन, खुले मैदान और पछुआ हवा की ‘तिगड़ी’ को भी लैब में तोला जाएगा। ये पता लगेगा कि गर्मी में ‘लोकल फैक्टर’ का कितना हाथ है और ‘ग्लोबल वॉर्मिंग’ का कितना।

बुंदेलखंड में होली के बाद गर्मी का तांडव: बांदा में तपिश ने पकड़ी रफ्तार, छूटा पसीनाशहर के अंदर भी ‘हीट आइलैंड’ का पोस्टमार्टम होगा। कंक्रीट की सड़कें, धूल भरे निर्माण, और छतों पर टीन की चादरें  ये सब मिलकर शहर को ‘माइक्रोवेव ओवन’ बना देती हैं। वैज्ञानिक यह भी जांचेंगे कि सड़कों पर डामर ज्यादा तप रहा है या नेताओं के वादे। पुराने तापमान रिकॉर्ड और नए सैटेलाइट डेटा को मिलाकर एक ‘हीट कुंडली’ बनेगी। इससे पता चलेगा कि बांदा की गर्मी ‘जन्मजात’ है या ‘मानव निर्मित’। इस रिपोर्ट के बाद जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को ‘हीट एक्शन प्लान’ बनाने में मदद मिलेगी।

 
 



Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh
 





 

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