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October 10, 2026
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बालाजी डायग्नोस्टिक का 'काला कारनामा' फाइलों में दफन': एक माह बाद भी जांच का 'अता-पता' नहीं !
उत्तर प्रदेशबुंदेलखंड

बालाजी डायग्नोस्टिक का ‘काला कारनामा’ फाइलों में दफन’: एक माह बाद भी जांच का ‘अता-पता’ नहीं !

विनोद मिश्रा डायरेक्टर सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश

  • विनोद मिश्रा

बांदा। जिले का कथित तौर पर सबसे बदनाम बालाजी डायग्नोस्टिक सेंटर एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार सुर्खी गलत रिपोर्ट की नहीं, बल्कि प्रशासनिक जांच के दब जाने की है। एक माह पहले गलत अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट का बहुचर्चित मामला उजागर हुआ था। पीड़ित ने डीएम से सेंटर सील करने और गहन जांच की मांग की थी। पर न सेंटर सील हुआ, न जांच आगे बढ़ी। चर्चा जोरों पर है कि “भ्रष्टाचार की सड़ांध में पूरी फाइल ही दबा” दी गई। पीड़ित शिव की आपबीती किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं। शिव ने पहले कानपुर के विशाल डायग्नोस्टिक सेंटर में अल्ट्रासाउंड कराया। रिपोर्ट आई कि बाईं ओर 2.9 मिलीमीटर की पथरी है। इलाज के लिए शिव बाँदा के बालाजी डायग्नोस्टिक सेंटर पहुंचे। यहां रिपोर्ट ने पूरा भूगोल ही बदल दिया। रिपोर्ट में दाहिनी ओर 3-4 मिलीमीटर की पथरी बता दी गई।

बालाजी डायग्नोस्टिक का 'काला कारनामा' फाइलों में दफन': एक माह बाद भी जांच का 'अता-पता' नहीं !दो रिपोर्टों में “जमीन आसमान” का फर्क देख शिव का माथा ठनका। सच्चाई जानने के लिए वह बाँदा मेडिकल कॉलेज पहुंचे। यहां तीसरी बार अल्ट्रासाउंड हुआ और सबसे चौंकाने वाला खुलासा हुआ। मेडिकल कॉलेज की रिपोर्ट में शरीर में किसी भी प्रकार की पथरी निकली ही नहीं। मतलब न बाएं, न दाएं, कहीं भी पथरी नहीं थी। इस विरोधाभास ने बालाजी डायग्नोस्टिक सेंटर की साख पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया। पीड़ित शिव का दावा है कि बालाजी सेंटर की त्रुटिपूर्ण रिपोर्ट से उसे भारी आर्थिक और मानसिक परेशानी हुई। गलत इलाज, फालतू की दवाएं और डर का माहौल। इसी आधार पर शिव ने जिलाधिकारी से शिकायत कर सेंटर की गहन जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई के साथ सेंटर सील करने की भी मांग की थी।

बालाजी डायग्नोस्टिक का 'काला कारनामा' फाइलों में दफन': एक माह बाद भी जांच का 'अता-पता' नहीं !शिकायत को एक माह बीत चुका है। पर न बालाजी डायग्नोस्टिक सेंटर सील हुआ और न ही प्रशासनिक जांच के आश्वासन का कोई अतापता है। प्रश्न उठ रहा है कि आखिर डीएम के आदेश के बाद भी जांच क्यों दब गई। क्या मानक विहीन इस कथित बदनाम सेंटर पर किसी का वरदहस्त है ! शहर में चर्चा है कि मोटी सेटिंग के चलते पूरी कार्रवाई को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है? लोगों का आरोप है कि बालाजी डायग्नोस्टिक सेंटर लंबे समय से मरीजों के शोषण का अड्डा बना हुआ है। न मानक पूरे हैं, न मशीनों की गुणवत्ता। गलत रिपोर्ट देने के कई मामले पहले भी सामने आ चुके हैं। फिर भी प्रशासन कार्रवाई से कतरा रहा है। फिलहाल पीड़ित शिव न्याय के लिए भटक रहा है और बालाजी डायग्नोस्टिक सेंटर रोजाना नए मरीजों की जेब काट रहा है। प्रशासनिक जांच भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई या जानबूझकर दबा दी गई, यह जांच का विषय है। पर सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब डीएम के आदेश का ये हाल है तो आम आदमी की सुनवाई कहां होगी। बालाजी सेंटर का बोर्ड आज भी चमक रहा है और मरीजों की किस्मत का फैसला भगवान भरोसे है।

 
 



Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh
 





 

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