- विनोद मिश्रा
बांदा। चित्रकूटधाम मंडल के इकलौते राजकीय मेडिकल कालेज की जनरल ओपीडी वाह्य रोगी विभागऔर आईपीडी आकस्मिक रोगी विभाग जिले में कोरोना के बढ़ते केसोंऔर चिकित्सीय स्टाफ की कमी को देखते हुए बंद कर दी गई है। यहां सिर्फ गंभीर मरीजों और कोरोना संदिग्ध मरीजों का ही इलाज होगा। दूसरी लहर में बेकाबू हो रहे कोरोना एवं डाक्टर तथा स्टाफ नर्सो की कमी को लेकर यह निर्णय लिया गया है। उधर, मेडिकल कॉलेज में कोरोना के गंभीर मरीजों के भर्ती होने की संख्या तेजी से बढ़ती ही जा रही है।

चिंताजनक स्थिति यह है की मेडिकल कालेज में कोरोना संक्रमितों को भर्ती किए जाने के लिए पर्याप्त 400 बेड हैं। इनमें गंभीर संक्रमितों के लिए 80 बेड की हाई डिपेंडेंसी यूनिट है।लेकिन स्वास्थ कर्मचारियों की कमी है। 75 स्टाफ नर्सो कीयहां कमी है पर प्रस्तावित भर्ती नहीं की जा रही। कोरोना इलाज के आंकड़ी दावे जरूर पेश किये जा रहे हैं।मंडल के चारों जनपदों से 152 कोरोना मरीज मेडिकल कालेज में भर्ती हैं। इनमें 12 संक्रमित आईसीयू में स्वस्थ होने की जंग लड़ रहे हैं। बांदा मेडिकल कालेज में कुछ माह पूर्व ही जनरल ओपीडी बहाल हुई थी। नॉन कोविड अस्पताल में इलाज कराने के लिए साधारण रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ी थी। रोजाना यहां पांच सौ से ज्यादा मरीज ओपीडी में आने लगे थे। पहली लहर और लॉकडाउन के बाद सारी व्यवस्था पटरी पर आने लगी थी कि अब कोरोना की दूसरी लहर नें पैरामेडिकल स्टाफ की कमी पाबंदियां लग गई। नतीजे में मेडिकल कालेज की जनरल ओपीडी बंद कर दी गई।

डायलिसिस, प्रसव, ऑपरेशन सहित कोरोना लक्षण वाले जुकाम-खांसी व बुखारको छोड़कर अन्य सारे विभाग बंद हो गए। इस बाबत प्रधानाचार्य डॉ. मुकेश यादव ने बताया कि यहां बड़ी संख्या में कोरोना मरीज भर्ती हैं। इसके अलावा कोरोना केस तेजी से बढ़ रहे हैं। चिकित्सीय स्टाफ की बेहद कमी है!इस वजह से नॉन कोविड और साधारण रोगियों के इलाज पर रोक का निर्णय लिया गया है। कहा कि गंभीर मरीजों के लिए मेडिकल कालेज की इमरजेंसी चालू रहेगी। कोरोना की दूसरी लहर से निपटने के लिए मेडिकल टीम उपलब्ध व्यवस्था से किसी तरह तैयार है। संक्रमितों को भर्ती करने के लिए 400 बेड हैं। इनमें 320 बेड आइसोलेशन वार्ड और 80 बेड आईसीयू में हैं। मौजूदा में मंडल के चारों जिलों के 152 कोरोना संक्रमित भर्ती हैं। इनमें 12 गंभीर कोरोना पॉजिटिव आईसीयू में हैं।

कोरोना के केस तेजी से बढ़ने पर आरटीपीसीआर जांच का दबाव भी बढ़ गया है। मेडिकल कालेज में जांच का दायरा बढ़ाने के लिए शासन ने एक और आरटीपीसीआर टेस्टिंग मशीन उपलब्ध कराई है। अभी मात्र एक टेस्टिंग मशीन है। प्रधानाचार्य डा. मुकेश यादव ने बताया कि आधुनिक तकनीक से लैस विदेशी आरटीपीसीआर जांच मशीन चेन्नई से बांदा आ रही है। मौजूदा समय में रोजाना लगभग 3500 से 4000 कोरोना टेस्ट किए जा रहे हैं। अभी दो सौ से तीन सौ नमूनों की जांच में आठ से 10 घंटे का समय लगता है। दूसरी मशीन शुरू होने पर इतने ही समय में दोगुना टेस्ट के प्रयास हो सकेंगे।

मेडिकल कालेज में कोरोना संदिग्धों की जांच और इलाज जारी है। इनमें जुकाम, खांसी, बुखार के मरीज शामिल हैं। फिजीशियन इन रोग से ग्रसित मरीजों को देखते रहेंगे। साथ ही इन रोगों के मरीजों के कोरोना टेस्ट भी किए जा रहे हैं। रिपोर्ट आने तक उन्हें नॉन कोविड वार्ड में रखा जाता है। पॉजिटिव मरीजों को आइसोलेशन में भर्ती कर दिया जाता है।

( शरद मिश्रा- संपादक )
( सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश )



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