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बांदा के नसीमुद्दीन कैसे बनें यूपी की राजनीति के 'चाणक्य' : अब किस दल का थामेंगे हाथ !
उत्तर प्रदेश

बांदा के नसीमुद्दीन कैसे बनें यूपी की राजनीति के ‘चाणक्य’ : अब किस दल का थामेंगे हाथ !

विनोद मिश्रा डायरेक्टर सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश

  • विनोद मिश्रा

बांदा। कांग्रेस से इस्तीफा देने के बाद ‘कद्दावर नेता पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन’ अब किस ‘पार्टी में शामिल’ होंगे अटकलों का दौर चल रहा है। कयास हैं की वह सपा या सांसद चंद्रशेखर की ‘आजाद समाज पार्टी’ में जा सकते हैं ! बांदा जिला की गलियों से निकलकर नसीमुद्दीन सिद्दीकी कैसे बने यूपी की राजनीति के ‘चाणक्य’ ? इसकी दिलचस्प कहानी है। नसीमुद्दीन कांग्रेस से इस्तीफा देने के पूर्व लंबे समय तक बसपा में सक्रिय रहे। अपने अनुभव के बल पर राज्य में अपनी अलग राजनीतिक पहचान बनाई।

बांदा के नसीमुद्दीन कैसे बनें यूपी की राजनीति के 'चाणक्य' : अब किस दल का थामेंगे हाथ !

नसीमुद्दीन सिद्दीकी मूल रूप से बांदा जिले के स्योंढ़ा गांव के रहने वाले हैं। उनका राजनीतिक सफर 1988 में बांदा पालिका अध्यक्ष पद के चुनाव से शुरू हुआ। हालांकि इस चुनाव में उन्हें हार मिली थी। 1991 में बसपा के टिकट से नसीमुद्दीन ने बांदा सदर सीट से विधायक का चुनाव जीतकर इतिहास रचा। वे यहां के पहले मुस्लिम विधायक बने, धीरे-धीरे मायावती के भरोसेमंद नेता भी बन गए। 2007 में जब बसपा की सरकार बनी,तब उनकी राजनीतिक मजबूती और प्रशासनिक क्षमता के कारण उन्हें ‘मिनी मुख्यमंत्री’ भी कहा गया।

नसीमुद्दीन सिद्दीकी के 'इस्तीफे' आया सियासी भूचाल: कांग्रेस की 'रणनीति' पर उठे सवाल

नसीमुद्दीन ने बसपा सरकार में कई महत्वपूर्ण पद संभाले। जब मायावती 1995 में पहली बार मुख्यमंत्री बनीं, तब उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया गया। इसके बाद 21 मार्च 1997 से 21 सितंबर 1997 तक शॉर्ट टर्म गवर्नमेंट में मंत्री रहे। 3 मई 2002 से 29 अगस्त 2003 तक एक साल के लिए वे फिर कैबिनेट का हिस्सा रहे। इसके बाद 13 मई 2007 से 7 मार्च 2012 तक फुल टाइम गवर्नमेंट में मंत्री रहे। उनकी नीतियों और प्रभाव के कारण उन्हें पश्चिमी यूपी में एक मजबूत नेता माना जाता था।

बांदा के नसीमुद्दीन कैसे बनें यूपी की राजनीति के 'चाणक्य' : अब किस दल का थामेंगे हाथ !

नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने अपने करियर में चुनावी राजनीति से ज्यादा संगठन और सदन के भीतर अपनी पकड़ मजबूत रखी। दो दशकों तक वे विधान परिषद सदस्य रहे हैं। उनकी पत्नी हुस्ना सिद्दीकी भी पांच साल तक एमएलसी रहीं। उनके बेटे अफजल सिद्दीकी ने 2014 में फतेहपुर लोकसभा सीट से चुनाव लड़े थे। नसीमुद्दीन ने फरवरी 2018 में बसपा छोड़कर कांग्रेस का दामन थामा था। जहां उन्होंने पश्चिमी यूपी में प्रांतीय अध्यक्ष पद संभाला। अब उन्होंने कांग्रेस से इस्तीफा देकर अपने राजनीतिक सफर में नई दिशा का संकेत दिया है। कयास हैं की वह सपा या चंद्रशेखर की आजाद समाज पार्टी में जा सकते हैं ! हालांकि, उन्होंने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं।

 

 

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh

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