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नो-मैपिंग के 'जाल' में फंसे मतदाता: 'पहचान' साबित करने को 'दफ्तरों' के लगा रहे चक्कर
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नो-मैपिंग के ‘जाल’ में फंसे मतदाता: ‘पहचान’ साबित करने को ‘दफ्तरों’ के लगा रहे चक्कर

शरद मिश्रा सम्पादक सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश

  • शरद मिश्रा

बांदा। लोकतंत्र की सबसे मजबूत कड़ी माने जाने वाले मतदाता आज अपने ही मताधिकार को बचाने के लिए सरकारी दफ्तरों की चौखट पर खड़े नजर आ रहे हैं। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के तहत मतदाता सूची के सत्यापन में “नो-मैपिंग” श्रेणी में चिह्नित किए गए सैकड़ों मतदाता पहचान साबित करने की जटिल प्रक्रिया से जूझ रहे हैं। जिला निर्वाचन विभाग द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बाद जिला, तहसील और ब्लाक स्तर के कार्यालयों में रोजाना मतदाताओं की भीड़ उमड़ रही है।

नो-मैपिंग के 'जाल' में फंसे मतदाता: 'पहचान' साबित करने को 'दफ्तरों' के लगा रहे चक्कर

निर्वाचन आयोग के निर्देशों के तहत वर्ष 2025 की प्रस्तावित मतदाता सूची के अनुसार जिले की चारों विधानसभा सीटों बांदा, बबेरू, तिंदवारी और नरैनी में कुल 13,49,521 मतदाता दर्ज हैं। वहीं वर्ष 2003 की मतदाता सूची के आधार पर 11,74,109 मतदाताओं का विशेष गहन पुनरीक्षण कराया गया। इस प्रक्रिया में 1,75,412 मतदाता अनुपस्थित, स्थानांतरित अथवा मृत पाए गए, जिन्हें नो-मैपिंग की श्रेणी में रखते हुए निर्वाचन विभाग ने नोटिस जारी किए हैं।

मतदाता 'मैपिंग' बनी चुनौती: 'वोटरों' की 'पहचान' पर प्रशासन की सख्ती, जारी होगा नोटिस !

मतदाताओं की पहचान की पुष्टि के लिए जिला निर्वाचन विभाग ने जिला, तहसील और ब्लॉक स्तर के अधिकारियों को निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी एवं सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी के रूप में नामित किया है। शनिवार को इन अधिकारियों के कार्यालयों में बड़ी संख्या में मतदाता पहुंचे और अपनी नागरिकता व पते से जुड़े साक्ष्य प्रस्तुत किए।

मतदाता 'मैपिंग' बनी चुनौती: 'वोटरों' की 'पहचान' पर प्रशासन की सख्ती, जारी होगा नोटिस !

अब तक 150 से अधिक आपत्तियों का निस्तारण किया जा चुका है, लेकिन बड़ी संख्या में मतदाता ऐसे भी हैं जो आवश्यक दस्तावेज न जुटा पाने के कारण असमंजस और चिंता में हैं। कई मतदाताओं ने आधार कार्ड और सामान्य निवास प्रमाण पत्र प्रस्तुत किए, परंतु इन्हें साक्ष्य के रूप में स्वीकार न किए जाने से उनकी परेशानी और बढ़ गई। सबसे अधिक दिक्कत उन मतदाताओं को हो रही है जो अपने माता-पिता के स्थायी निवास का प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर पा रहे हैं। अधिकारियों ने ऐसे 41 मतदाताओं को एक सप्ताह का समय देते हुए आवश्यक साक्ष्य प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। चेतावनी दी गई है कि तय समयसीमा में प्रमाण न देने पर उनका नाम मतदाता सूची से हटाने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।

 

 

 

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh

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