
- विनोद मिश्रा
बांदा। जिला पंचायत अध्यक्ष सुनील पटेल के खिलाफ चल रहा “अनशन” अब “शांत विरोध नहीं”, बल्कि “सत्ता और सिस्टम” के खिलाफ “खुला विद्रोह” बन चुका है। जिला पंचायत परिसर स्थित अटल वाटिका में “पांचवें दिन” जारी अनशन ने “उस वक्त तहलका” मचा दिया, जब “समाजवादी पार्टी” के “विधायक विशंभर सिंह यादव” स्वयं मौके पर पहुंचे और “अनशनकारियों” को “खुला राजनीतिक संबल” दे दिया। विधायक ने दो टूक शब्दों में कहा “यह सिर्फ अनशन नहीं, भ्रष्टाचार के खिलाफ आर-पार की लड़ाई है। अब पीछे हटने का सवाल ही नहीं।”

विधायक विशंभर यादव ने सीधे-सीधे सरकार और प्रशासन को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि जिला पंचायत अध्यक्ष सुनील पटेल पर करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार और गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप हैं। मंडलायुक्त द्वारा महोबा जिलाधिकारी से कराई गई जांच में अध्यक्ष दोषी पाए जा चुके हैं, इसके बावजूद न तो उनके वित्तीय अधिकार सीज किए गए और न ही उन्हें पद से हटाया गया।

उन्होंने सवाल दागा “जब जांच में दोष सिद्ध है,तो कार्रवाई क्यों नहीं? क्या सत्ता का संरक्षण भ्रष्टाचार से भी बड़ा हो गया है?” विधायक ने कहा कि यह पूरा मामला योगी सरकार के स्वच्छ प्रशासन के दावों की सरेआम पोल खोल रहा है। अगर दोषी को बचाया जाता है, तो यह साफ संदेश है कि ईमानदारी सिर्फ भाषणों तक सीमित है और ज़मीनी हकीकत कुछ और है।

विशंभर यादव ने साफ किया कि वह केवल विपक्षी विधायक नहीं, बल्कि जिला पंचायत बॉडी के पदेन सदस्य भी हैं। उन्होंने बताया कि जिला पंचायत की बैठकों में उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ जोरदार विरोध किया, लेकिन हर बार मामले को दबाने की कोशिश की गई। विधायक विशंभर ने कहा “यह कागज़ी खेल नहीं, जनता के खून-पसीने की कमाई की लूट है”।

विधायक ने अध्यक्ष पर सबसे गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पंचायत द्वारा संचालित कृषि महाविद्यालय के 12 कर्मचारियों को नियमों को ताक पर रखकर बर्खास्त कर दिया गया। उन्होंने इसे “घोर अमानवीय और क्रूर अत्याचार” बताया। “भावुक लहजे” में विधायक बोले “करीब एक साल से ये कर्मचारी और उनके परिवार तड़प रहे हैं”। उनकी “आह और कराह” से ऊपर वाला भी “मर्माहित” हो गया होगा। इस पाप के लिए ईश्वर भी माफ नहीं करेगा। विधायक विशंभर यादव के पहुंचते ही अनशन स्थल रणक्षेत्र में बदल गया।

सुनील पटेल के विरोध में गगनचुंबी नारे लगे। डीडीसी सदस्यों और समर्थकों ने साफ कर दिया कि अब यह आंदोलन दबने वाला नहीं है। अनशन पर बैठे डीडीसी सदस्य भरत सिंह, धीरज, नीरज प्रजापति सहित अन्य सदस्यों ने विधायक के समर्थन के लिए आभार जताते हुए चेतावनी दी कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को जिला से प्रदेश स्तर तक ले जाया जाएगा।
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