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विधायक विशम्भर यादव की सदन में 'दहाड़' : खेल मैदान नहीं, मुनाफे की मंडी चाहती है सरकार ?
उत्तर प्रदेश

विधायक विशम्भर यादव की सदन में ‘दहाड़’ : खेल मैदान नहीं, मुनाफे की मंडी चाहती है सरकार ?

विनोद मिश्रा डायरेक्टर सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश

  • विनोद मिश्रा

बांदा। उत्तर प्रदेश की राजनीति में उस वक्त भूकंप आ गया, जब बबेरू विधानसभा क्षेत्र से समाजवादी पार्टी के विधायक विशम्भर यादव ने विधानसभा के पटल पर राइफल क्लब खेल मैदान का मुद्दा उछालकर सरकार को कठघरे में खड़ा करनें की कोशिश की। सदन में उनके आक्रामक तेवर, तीखे शब्द और ऐतिहासिक तथ्यों की बौछार भरे पत्र से सत्ता पक्ष में खलबली थी। यह केवल एक सवाल नहीं था, बल्कि सरकार और बांदा विकास प्राधिकरण की नीयत पर सीधा हमला था !

विधायक विशम्भर यादव की सदन में 'दहाड़' : खेल मैदान नहीं, मुनाफे की मंडी चाहती है सरकार ?

विधायक विशम्भर यादव ने नियम-56 के तहत चर्चा की मांग करते हुए साफ कहा कि बांदा विकास प्राधिकरण की नजर शहर के एकमात्र खेल मैदान पर है, और इसे बचाने के बजाय नीलामी कर व्यावसायिक सौदेबाजी की साजिश रची जा रही है। यह सिर्फ जमीन का मामला नहीं, बल्कि खिलाड़ियों के भविष्य, खेल संस्कृति और जनभावनाओं से सीधी गद्दारी है।

विधायक विशम्भर यादव की सदन में 'दहाड़' : खेल मैदान नहीं, मुनाफे की मंडी चाहती है सरकार ?

विधायक ने तीखे लहजे में सवाल दागा है की जब बांदा में पहले ही खेल सुविधाओं का ‘घोर अभाव’ है, तो फिर एकमात्र ‘ऐतिहासिक खेल मैदान’ को बेचने की ‘हड़बड़ी’ क्यों ? उन्होंने बताया कि राइफल क्लब मैदान का इतिहास 1902 से जुड़ा है, जब इसे तत्कालीन जमींदार ने 99 वर्षों के पट्टे पर पुलिस परेड ग्राउंड के लिए दिया था। समय के साथ यही मैदान बांदा की खेल नर्सरी बना, जहां से दर्जनों खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जिले और प्रदेश का नाम रोशन किया।

विधायक विशम्भर यादव की सदन में 'दहाड़' : खेल मैदान नहीं, मुनाफे की मंडी चाहती है सरकार ?

विधायक विशम्भर यादव ने आरोप लगाया कि वर्ष 1993-94 में बांदा विकास प्राधिकरण ने तथ्यों को छिपाकर इस ऐतिहासिक मैदान को नजूल भूमि बताकर फ्रीहोल्ड करा लिया। इसके बाद इसे व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स में बदलने की साजिश रची गई। उन्होंने याद दिलाया कि इस साजिश पर 2006 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने खुद इसी मैदान से घोषणा कर इसे खेल मैदान के रूप में सुरक्षित किया था। लेकिन अब एक बार फिर विकास प्राधिकरण की पुरानी फाइलें धूल झाड़कर खोली जा रही हैं, मैदान को ‘नीलामी के रास्ते बेचने’ की तैयारी चल रही है।

विधायक विशम्भर यादव की सदन में 'दहाड़' : खेल मैदान नहीं, मुनाफे की मंडी चाहती है सरकार ?

विधायक ने कहा कि इस साजिश से खिलाड़ी और खेल प्रेमी गहरे आक्रोश में हैं। उन्होंने चेताया कि अगर यह मैदान छीना गया तो यह ‘बांदा के खेल इतिहास पर बुलडोजर’ चलाने जैसा होगा। विशम्भर यादव ने विधानसभा अध्यक्ष से मांग की कि इस गंभीर मुद्दे पर सदन की कार्यवाही रोककर तत्काल विस्तृत चर्चा कराई जाए। सपा नेता ओम नारायण विदित के आग्रह पर विधायक विशंभर नें इस ‘मुद्दे’ पर ‘सरकार का ध्यान’ खींचा

 

 

 

 

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh

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