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October 11, 2026
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चित्रकूट में ‘सलमान’ और ‘शाहरुख’ बने आकर्षण का केंद्र: देश-विदेश से पहुंचे व्यापारी
उत्तर प्रदेश

चित्रकूट में ‘सलमान’ और ‘शाहरुख’ बने आकर्षण का केंद्र: देश-विदेश से पहुंचे व्यापारी

विनोद मिश्रा डायरेक्टर सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश

  • विनोद मिश्रा

बांदा। दीपावली के पावन पर्व पर जहां घर-आंगन दीपों की रौशनी से जगमगाए, वहीं चित्रकूट की मंदाकिनी गंगा तट पर एक अनोखी परंपरा ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। सदियों पुराना विश्व प्रसिद्ध गधा मेला मंगलवार से शुरू हो गया। इस मेले में देश-विदेश के व्यापारी 300 से अधिक गधे, खच्चर और घोड़ियां लेकर पहुंचे, जिससे पूरा इलाका अनोखी रौनक से भर उठा।

चित्रकूट में ‘सलमान’ और ‘शाहरुख’ बने आकर्षण का केंद्र: देश-विदेश से पहुंचे व्यापारी

हर साल की तरह इस बार भी मेले में ‘सलमान’, ‘शाहरुख’, ‘बसंती’ और ‘धोनी’ नाम के गधे आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। इनकी चाल, ताकत और रंग देखकर खरीदारों ने लाखों की बोली लगाई। पिछले साल ‘सलमान’ नाम का गधा 1.85 लाख, ‘शाहरुख’ 1.25 लाख और ‘बसंती’ नाम की गधी 85 हजार रुपए में बिकी थी। इस बार उम्मीद जताई जा रही है कि बोली का आंकड़ा दो लाख के पार जा सकता है।

चित्रकूट में ‘सलमान’ और ‘शाहरुख’ बने आकर्षण का केंद्र: देश-विदेश से पहुंचे व्यापारी

इस बार मेले में एक खास नज़ारा यह रहा कि एक महिला व्यापारी घूंघट डालकर मेले में पहुंची और 15 गधे-खच्चर खरीदे। यह महिला मध्य प्रदेश से आई थी और उसने कहा कि “हमारे क्षेत्र में ईंट भट्टों में इन जानवरों की भारी मांग रहती है।” मेले में न सिर्फ उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और बिहार ही नहीं बल्कि नेपाल और अफगानिस्तान से भी व्यापारी पहुंचे हैं।

चित्रकूट में ‘सलमान’ और ‘शाहरुख’ बने आकर्षण का केंद्र: देश-विदेश से पहुंचे व्यापारी

हर व्यापारी अपने गधों को अलग-अलग सजावट और अनोखे नामों के साथ लाया है। किसी गधे के गले में घंटियां, तो किसी के माथे पर चमकीले ताज लगे हैं। बच्चों और सैलानियों की भीड़ इन आकर्षक गधों को देखने के लिए उमड़ी हुई है। इतिहासकार बताते हैं कि इस मेले की शुरुआत औरंगजेब के शासनकाल (सन 1670) में हुई थी। तब उसने निर्माण कार्यों के लिए गधों की खरीद कराई थी। तब से लेकर आज तक यह परंपरा हर साल दीपावली के बाद चित्रकूट की मंदाकिनी तट पर निभाई जाती है। राजस्थान के पुष्कर मेले के बाद यह देश का दूसरा सबसे बड़ा पशु मेला माना जाता है। यह मेला तीन दिन तक चलेगा।

 

 

 

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh

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