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October 11, 2026
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बांदा-चित्रकूट समेत पूरे रूट पर 'अभेद्य सुरक्षा': रेलवे स्टेशनों पर लगेगा 'ऑटोमेटिक' ब्रेक सिस्टम
उत्तर प्रदेशबुंदेलखंड

बांदा-चित्रकूट समेत पूरे रूट पर ‘अभेद्य सुरक्षा’: स्टेशनों पर लगेगा ‘ऑटोमेटिक’ ब्रेक सिस्टम

शरद मिश्रा सम्पादक सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश

  • शरद मिश्रा

बांदा। कभी “बीहड़ों के नाम से जाना जाता था बुंदेलखंड, आज विकास की पटरी पर सरपट दौड़” रहा है। “वीरांगना लक्ष्मीबाई की धरती से चित्रकूट की तपोभूमि” तक बिछी 290 किलोमीटर लंबी रेल लाइन अब सिर्फ लोहे की पटरियां नहीं, बल्कि “बुंदेलखंड के सपनों की रफ्तार” है। इसी रफ्तार को अब सुरक्षा का अभेद्य ‘कवच’ मिलने जा रहा है। केंद्र सरकार ने बुंदेलखंड के इस लाइफलाइन रूट के लिए खजाना खोल दिया है।बांदा-चित्रकूट समेत पूरे रूट पर 'अभेद्य सुरक्षा': रेलवे स्टेशनों पर लगेगा 'ऑटोमेटिक' ब्रेक सिस्टमझांसी-मानिकपुर रेलखंड पर अब “हादसों का ब्रेक” लगेगा। रेलवे बोर्ड ने इस पूरे 290 किलोमीटर के रूट को विश्व की सबसे आधुनिक ऑटोमेटिक ट्रेन प्रोटेक्शन प्रणाली ‘कवच’ से लैस करने के लिए 104.6 करोड़ रुपये की सौगात दी है। अगस्त 2025 में स्वीकृत हुई “यह महत्वाकांक्षी परियोजना मार्च 2028 तक धरातल पर उतर” जाएगी। टेंडर अंतिम चरण में है।बांदा-चित्रकूट समेत पूरे रूट पर 'अभेद्य सुरक्षा': रेलवे स्टेशनों पर लगेगा 'ऑटोमेटिक' ब्रेक सिस्टमयह सिर्फ “तकनीक नहीं, बुंदेलखंड के विकास का नया अध्याय” है। झांसी, ओरछा, बरुआसागर, मऊरानीपुर, हरपालपुर, महोबा, कबरई, बांदा, अतर्रा, चित्रकूटधाम कर्वी से मानिकपुर तक 26 स्टेशनों के बीच का “हर इंच हाईटेक” होगा। ट्रैक पर “सेंसर, सिग्नल पर डिवाइस और इंजन में कवच का दिमाग” लगेगा।बांदा रेलखंड पर यात्री सुविधाओं और ट्रेनों की 'दरकार': बढ़ती भीड़ से बढ़ रहीं मुश्किलेंकवच क्या है ? समझिए- “ट्रेन का एक ऐसा बॉडीगार्ड जो कभी सोता नहीं”। अगर ड्राइवर से चूक हुई, स्पीड बढ़ी या लाल बत्ती दिखने पर ब्रेक नहीं लगा तो कवच खुद चिल्लाएगा और खुद ही “ब्रेक” लगा देगा। बुंदेलखंड में जहां घने कोहरे में ट्रेनें रेंगती हैं, वहां “कवच ड्राइवर की आंख बनकर काम” करेगा। यानी “सुरक्षा भी, समय की पाबंदी” भी।बांदा-चित्रकूट समेत पूरे रूट पर 'अभेद्य सुरक्षा': रेलवे स्टेशनों पर लगेगा 'ऑटोमेटिक' ब्रेक सिस्टमरेलवे अधिकारियों की मानें तो यह प्रोजेक्ट झांसी, बांदा, चित्रकूट और प्रयागराज के बीच “कनेक्टिविटी को अभेद्य” बनाएगा। “यात्रियों का भरोसा बढ़ेगा, पर्यटन बढ़ेगा और व्यापार को नई रफ्तार” मिलेगी। झांसी मंडल के पीआरओ मनोज कुमार सिंह ने बताया कि प्रयागराज मुख्यालय में पीसीएसटीई दीपक कुमार सिन्हा खुद इसकी मॉनिटरिंग कर रहे हैं, जबकि डिप्टी सीएसटीई प्रोजेक्ट राज कुमार और एसएसई प्रहलाद चिचोड़िया फील्ड में गुणवत्ता परखेंगे।

 
 



Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh
 





 

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