
- विनोद मिश्रा
बांदा। नरैनी विधानसभा में अगर “किसी एक नाम की सबसे ज्यादा चर्चा” है तो वह है रमेश चंद्र कोरी। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य रमेश कोरी आज “किसी परिचय के मोहताज नहीं” हैं। उनका “व्यक्तित्व सादगी से भरा और कृतित्व सेवा से सना” हुआ है।
रमेश कोरी “पेशे से नेता नहीं, पेशे से जनसेवक” हैं। सुबह से शाम तक उनका एक ही काम है जनता के बीच रहना। नरैनी के किसी गांव में शादी हो, किसी पुरवे में बीमारी हो, किसी गरीब के घर में संकट हो, “रमेश कोरी बिना बुलाए पहुंच” जाते हैं। यही वजह है कि “लोग उन्हें नेता नहीं, अपने परिवार का सदस्य” मानते हैं।
उनकी “सबसे बड़ी ताकत है उनकी साफ-सुथरी छवि”। आज की “राजनीति में जहां दागदार चेहरे आम हैं, वहीं रमेश कोरी बेदाग” हैं। न कोई मुकदमा, न कोई विवाद,न कोई अहंकार। “सबको साथ लेकर चलने की उनकी कला” ही उन्हें “सर्वमान्य” बनाती है। दलित समाज से आने के बावजूद “उन्होंने कभी जाति की राजनीति नहीं की, बल्कि सर्व समाज को अपना परिवार” बनाया।
गठबंधन के “टिकट सर्वे” में उनका “पहले पायदान पर आना महज संयोग नहीं, बल्कि वर्षों की तपस्या का फल” है। कांग्रेस की विचारधारा को “गांव-गांव” तक पहुंचाने में उनकी “भूमिका अहम” रही है। जनता कहती है की रमेश कोरी वादा नहीं, इरादा लेकर आते हैं। ऐसे में “अगर गठबंधन ने उन पर भरोसा जताया तो नरैनी में जीत का नया इतिहास लिखा” जाना तय है।
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