24 C
Lucknow
October 11, 2026
City News Uttar Pradesh
विशेष रिपोर्ट: पाठा के वह दो शेर, जिनके नाम से कांपता था दुर्दांत ददुआ !
उत्तर प्रदेशबुंदेलखंड

विशेष रिपोर्ट: पाठा के वह दो शेर, जिनके नाम से कांपता था दुर्दांत ददुआ !

विनोद मिश्रा डायरेक्टर सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश

  • विनोद मिश्रा

चित्रकूट। बांदा-चित्रकूट के “पाठा की धरती” पर “एक दौर” था जब “ददुआ का नाम सुनकर लोग दहशत” में आ जाते थे। लेकिन उसी पाठा में “दो ऐसे भी शेर पैदा” हुए, जिनके “नाम से खुद ददुआ की रगों का खून जम” जाता था। वह नाम थे “देवकुमार करवरिया और जगमोहन यादव”।विशेष रिपोर्ट: पाठा के वह दो शेर, जिनके नाम से कांपता था दुर्दांत ददुआ ! कहा जाता है कि ददुआ ने एक बार “अपने गुर्गों” के साथ “देवकुमार करवरिया का अपहरण” कर लिया था। “डेढ़ महीने तक बंधक” बनाकर रखा। लेकिन देवकुमार के “परिजनों और रिश्तेदारों” ने जवाब में “ददुआ के कई करीबी लोगों को उठा” लिया। यह “ईंट का जवाब पत्थर” से था। आखिरकार ददुआ को “झुकना” पड़ा और देवकुमार को “छोड़ना” पड़ा। उसी दिन से देवकुमार ने एक ही “प्रण” लिया था “ददुआ के आतंक को खत्म” करना।विशेष रिपोर्ट: पाठा के वह दो शेर, जिनके नाम से कांपता था दुर्दांत ददुआ !दूसरी कहानी है अहरी वाले जगमोहन यादव की। उनकी “डेयरी से ददुआ का गुर्गा नत्थू पटेल रोज जबरन दूध” ले जाता था। एक दिन जगमोहन ने “हिम्मत” दिखाई, नत्थू को “बांधकर पीटा और उसकी बंदूक छीनकर पुलिस के हवाले” कर दिया। यह ददुआ को “नागवार” गुजरा। 23 मई 1989 की रात ददुआ ने “अपने गैंग के साथ जगमोहन के डेरे पर हमला” बोल दिया। जगमोहन के पास उस वक्त सिर्फ एक नाली बंदूक थी, लेकिन “हौसला शेर” जैसा। उस “मुठभेड़ में ददुआ के तीन गुर्गे मारे” गए। जाते-जाते ददुआ ने डेरे में आग लगा दी, जिसमें जगमोहन के “पिता गणेश यादव की दर्दनाक मौत” हो गई। उस रात के बाद जगमोहन की “आंखों में सिर्फ बदले की आग” थी।विशेष रिपोर्ट: पाठा के वह दो शेर, जिनके नाम से कांपता था दुर्दांत ददुआ !इसके बाद देवकुमार और जगमोहन “एक” हो गए। दोनों ने मिलकर “ददुआ के दाहिने हाथ” कहे जाने वाले “राधे कुर्मी” को पहले “उसकी प्रेमिका के जरिए जहर” दिलवाया और फिर “गोली मारकर अपाहिज” बना दिया। 26 जून 2003 का दिन “पाठा के इतिहास में दर्ज” है। ददुआ ने खुद इन दोनों पर “घात लगाकर हमला” किया। मंदिर के चबूतरे की ओट लेकर देवकुमार और जगमोहन ने “मुंहतोड़ जवाब” दिया। ददुआ का खास गुर्गा गोपला चमार समेत “दो डकैत वहीं ढेर” हो गए और ददुआ को “जान” बचाकर “भागना” पड़ा। कहा जाता है उसके बाद ददुआ ने फिर कभी उस “इलाके में घुसने की हिम्मत नहीं” की।ददुआ जिसके 'नाम' से 'कांपती' थी सरकार ? बंदूक से 'राजनीति' तक कैसे चला 'साम्राज्य' ?इस लड़ाई में पाठा के दो और वीर “चंदन यादव और दयाशंकर शुक्ला” भी थे, जिनके सामने ददुआ कभी “टिक नहीं” पाया। हालांकि ददुआ ने “धोखे से पीठ पीछे से उनकी हत्या” कर दी। जो लोग आज भी ददुआ को “नायक” बनाकर पेश करते हैं, उन्हें पाठा के इन “असली सपूतों” की कहानी जरूर जाननी चाहिए, जिन्होंने बिना किसी सरकारी मदद के, सिर्फ अपने दम पर आतंक के खिलाफ मोर्चा लिया।

 
 



Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh
 





 

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh
 
Subscribe to us on Youtube to watch the latest video news updates.

Notice: This report has been updated by City News Uttar Pradesh Desk, . Full responsibility for the content of this report rests with City News Uttar Pradesh Desk. Neither www.citynewsuttarpradesh.in nor the Editorial Board bears any responsibility.

Related News

अयोध्या राम मंदिर : उद्घाटन में शामिल होंगे टीवी के “राम” और “चाणक्य”, बोले- बरसों से कर रहे थे इस पल का इंतजार

बालू खदान मरौली खंड चार और छह मोदी और योगी से हैं निर्भय ! क्या प्रशासन बना धृतराष्ट ?

City News Uttar Pradesh

मंत्री रामकेश द्वारा महिलाओं का सम्मान:बोले जहां नारी का सम्मान, वहीं देवताओं का वास”

छात्रों के ‘आक्रोश’ ने ‘हिलाया’ प्रशासन: भ्रष्टाचार, बेरोज़गारी व छात्रसंघ चुनाव पर ‘गरजी’ आवाज़

City News Uttar Pradesh

Banda : आयुक्त और डीएम की सलाह माने, फहरेगी महामारी पर विजय पताका ! …

महोबा की मेडिकल कालेज हेतु गोहार : गरीबों की सुनों सरकार

City News Uttar Pradesh
ब्रेकिंग न्यूज़