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बरियारपुर बांध बना मौत का साया मरम्मत खतरनाक : नए बांध की सिफारिश
उत्तर प्रदेश

बरियारपुर बांध बना मौत का साया मरम्मत खतरनाक : नए बांध की सिफारिश

दशहरा विजयादशमी पर्व की समस्त देशवासियों को हार्दिक बधाई एंव शुभकामनाएं || रामकेश निषाद ( जल शक्ति राज्य मंत्री - उत्तर प्रदेश सरकार ) विज्ञापन

विनोद मिश्रा डायरेक्टर सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश

  • विनोद मिश्रा

बांदा। बुंदेलखंड की प्यास बुझाने वाला और किसानों की खेती का सहारा माने जाने वाला 115 साल पुराना बरियारपुर बांध अब मौत का साया बनता जा रहा है। सिंचाई विभाग की तकनीकी समिति ने साफ शब्दों में कहा है कि इस बांध की मरम्मत कराना अब खतरे से खाली नहीं है। समिति की रिपोर्ट के बाद केंद्रीय जल आयोग को भेजे गए प्रस्ताव में यह सिफारिश की गई है कि डाउन स्ट्रीम पर नया बांध बनाया जाए।

हाय दईया : बरियारपुर बांध की मरम्मत से तकनीकी समिति ने मुंह मोड़ा : हो नया निर्माण

बरियारपुर बांध से निकलने वाली मुख्य केन नहर के सहारे जिले की लगभग 1100 किलोमीटर लंबी नहर प्रणाली को पानी मिलता है। इसी पानी से हजारों किसान अपनी खेती करते हैं। लेकिन अब बांध की क्षमता 12.50 मिलियन क्यूबिक मीटर (एमसीएम) तक घट गई है। दीवारें जर्जर हैं, सुरंगों में दरारें हैं और ऊपर लगे लोहे के फाटक किसी भी वक्त हादसे को न्योता दे सकते हैं !

हाय दईया : बरियारपुर बांध की मरम्मत से तकनीकी समिति ने मुंह मोड़ा : हो नया निर्माण

सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता ने खुद स्वीकार किया है कि बरियारपुर ही नहीं, बल्कि पारीक्षा और बरूवा सागर बांध भी जर्जर हालत में हैं। हर साल मरम्मत के नाम पर लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं,लेकिन नतीजा शून्य है। अब विभाग ने भी हाथ खड़े कर दिए हैं और कहा है कि नया बांध ही इस समस्या का स्थायी समाधान है। बरसात के मौसम में जब केन नदी उफान मारती है, तो बरियारपुर बांध के ऊपर से लाखों क्यूसेक पानी बहता है। कमजोर दीवारें और पुराने लोहे के गेट इस दबाव को कितना सह पाएंगे, इस पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है ? अगर बांध टूटता है तो भीषण तबाही मच सकती है।

बरियारपुर बांध बना मौत का साया मरम्मत खतरनाक : नए बांध की सिफारिश

बुंदेलखंड का किसान पहले ही पानी की कमी और सूखे की मार झेल रहा है। अब अगर बरियारपुर बांध बेकार हो गया तो सिंचाई का संकट और गहराएगा। किसानों का कहना है कि यह बांध उनकी जिंदगी की डोर है। सरकार और विभाग को तुरंत ठोस कदम उठाने चाहिए, वरना खेती बर्बाद हो जाएगी। बारिश का मौसम थमते ही केंद्रीय जल आयोग की टीम बांध का निरीक्षण करने आ सकती है। उसी सर्वे के आधार पर बरियारपुर बांध का भविष्य तय होगा।

 

 

 

 

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh

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