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शिक्षकों का 'टीईटी' की नई नीति पर सड़कों पर फूटा 'गुस्सा' : दिया ज्ञापन
उत्तर प्रदेश

शिक्षकों का ‘टीईटी’ की नई नीति पर सड़कों पर फूटा ‘गुस्सा’ : दिया ज्ञापन

विनोद मिश्रा डायरेक्टर सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश

  • विनोद मिश्रा

बांदा। सरकार की नई टीईटी नीति ने पुराने बेसिक शिक्षकों में आक्रोश की ज्वाला भड़का दी है। बांदा जिले में उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ की स्थानीय इकाई के बैनर तले हजारों की संख्या में शिक्षक व शिक्षिकाएँ काले कपड़े पहनकर सड़कों पर उतरे। प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपते हुए शिक्षकों ने चेतावनी दी ‘यदि सेवा शर्तों से छेड़छाड़ नहीं रोकी गई तो दिल्ली और लखनऊ तक कूच’ किया जाएगा।

शिक्षकों का 'टीईटी' की नई नीति पर सड़कों पर फूटा 'गुस्सा' : दिया ज्ञापन

ज्ञापन देने से पहले सभी शिक्षक-शिक्षिकाएँ जीआईसी मैदान में एकत्रित हुए। हाथों में तख्तियाँ और बैनर लिए भीड़ ने नारेबाजी करते हुए सरकार की नई नीति का विरोध किया। शिक्षक नेताओं का कहना था कि वर्षों से भर्ती नियमों और योग्यता मानदंडों को बदल-बदल कर शिक्षक बनाए गए। “आज कोई भी शिक्षक जबरदस्ती शिक्षक नहीं बना, हर किसी ने सरकार द्वारा तय प्रक्रिया को पूरा किया और परीक्षा पास कर ही नियुक्ति पाई है।”

शिक्षकों का 'टीईटी' की नई नीति पर सड़कों पर फूटा 'गुस्सा' : दिया ज्ञापन

जिला अध्यक्ष आशुतोष त्रिपाठी ने कहा “समस्या टेस्ट की नहीं बल्कि सेवा शर्तों से छेड़छाड़ की है, जो हमको नामंजूर है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि पहले हाईस्कूल व बीटीसी, फिर इंटर-बीटीसी, उसके बाद स्नातक-बीटीसी, विशिष्ट बीटीसी और बीएड-टेट की अनिवार्यता रही है। हर चरण में सरकार के मापदंडों को पूरा कर शिक्षक नियुक्त हुए हैं। ऐसे में आज सेवा शर्तों से छेड़छाड़ करना पूरी तरह अनुचित है।

शिक्षकों का 'टीईटी' की नई नीति पर सड़कों पर फूटा 'गुस्सा' : दिया ज्ञापन

शिक्षकों ने बताया कि हाल ही में माननीय उच्चतम न्यायालय के 1 सितंबर के निर्णय को गलत तरीके से प्रचारित किया गया। इसमें कहा गया कि 25 अगस्त 2010 के पहले नियुक्त शिक्षक भी टीईटी के दायरे में आएंगे और ऐसा न होने पर सेवा से बाहर कर दिए जाएंगे। इस भ्रम ने शिक्षकों के बीच असमंजस और भय पैदा कर दिया। संघ ने स्पष्ट किया कि भारत सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व निर्देशों के अनुसार 25 अगस्त 2010 और 29 जुलाई 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी अनिवार्य नहीं है। ऐसे में केंद्र और राज्य को इस मसले पर स्पष्ट निर्णय लेना चाहिए, वरना बड़ा आंदोलन होगा। ज्ञापन सौंपते हुए शिक्षकों ने दो टूक कहा कि अगर हमारे हितों की अनदेखी की गई तो संगठन न्यायालय से लेकर दिल्ली की सड़कों तक हर स्तर पर आंदोलन करेगा।

 

 

 

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh

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