- विनोद मिश्रा
बांदा (कालिजर) : एतिहासिक कालिंजर दुर्ग के जंगल में लगी आग पर दूसरे दिन भी काबू नहीं पाया जा सका। आग की चपेट में आने से बड़ी संख्या में पेड़ झुलस गए। आग पर काबू पाने के लिए लगाई गई दो दमकल की गाड़ियों के प्रयास भी नाकाफी रहे। सुबह तीन बजे तक आग पर काबू न पा पाने के बाद कर्मी गाड़ियां लेकर मुख्यालय चले गए। सोमवार शाम तक कई हिस्सों में आग की लपटें देखी गईं। दुर्ग का लगभग पूरा जंगल आग की चपेट में आ गया। कराया गया पौधारोपण व जंगली पशु-पक्षियों के ठिकाने भी जल गए। देर रात तक आग की लपटें देख नीचे कस्बे में भी अफरातफरी का माहौल रहा।

एतिहासिक व सांस्कृतिक धरोहर संजोए कालिजर दुर्ग में रविवार को लगी आग ने शाम होते ही विकराल रूप धारण कर लिया। सड़क मार्ग से दुर्ग में प्रवेश करते ही आग की भयावहता देखी जा सकती थी। मार्ग के आस-पास का पूरा जंगल आग में जल कर समाप्त होने की कगार पर पहुंच गया। हरे पेड़ ठूंठ नजर आने लगे। दुर्ग के जंगल में लगी आग की लपटें कई किमी. दूर कस्बे से दिखाई देती रहीं। कस्बे वासियों में भय का माहौल बना रहा। कालिजर दुर्ग मे तैनात भारतीय पुरातत्व विभाग के सर्किल ऑफिसर सतेंद्र कुमार ने बताया कि आग से दुर्ग के ऊपर के जंगल के काफी हिस्से में पेड़ पौधे व वन जीवों को भारी क्षति पहुंची है। आग पर काबू पाने के लिए रात तीन बजे तक फायर ब्रिगेड के कर्मचारी अपनी डयूटी करते रहे। दुर्ग में पानी की कमी के चलते फायर ब्रिगेड कर्मचारियों को खासी दिक्कत का सामना करना पड़ा। इसके बाद वह दमकल गाड़ियां लेकर चले गए। अभी भी आग कई जगह सुलग रही है। दुर्ग में कराए गए पौधारोपण आदि कार्य को भारी क्षति पहुंची है। अब आग उस हिस्से में है, जहां पहुंचना कठिन है।

( शरद मिश्रा- संपादक )
( सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश )




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