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August 27, 2026
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एडीएम-हॉस्पिटल रिश्ते पर हंगामा: शराब की बोतल और सत्ता का साया, सवालों में प्रशासन
उत्तर प्रदेश

एडीएम-हॉस्पिटल रिश्ते पर हंगामा: शराब की बोतल और सत्ता का साया, सवालों में प्रशासन

विनोद कुमार मिश्रा ( सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश )

  • विनोद मिश्रा

बांदा। जिले में तैनात एडीएम राजेश वर्मा का नाम एक संवेदनशील और सनसनीखेज विवाद में आ गया है। मामला उनकी पत्नी की एक निजी शिवकृष्ण मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल में पार्टनरशिप, कथित सजातीय लाभ, और प्रभाव के दुरुपयोग से जुड़ा है ! एक ओर जहां सोशल मीडिया में कुछ तस्वीरें आग की तरह फैली हैं।

एडीएम-हॉस्पिटल रिश्ते पर हंगामा: शराब की बोतल और सत्ता का साया, सवालों में प्रशासन

जब विवाद बढ़ा और सोशल मीडिया पर तस्वीरें वायरल होने लगीं, तो अस्पताल संचालक अरुणेश पटेल सामने आए। लेकिन शायद उन्हें अंदाजा नहीं था कि प्रेस वार्ता उनके लिए आत्मघाती साबित हो सकती है। उन्होंने प्रेस के सामने यह स्वीकारा कि एडीएम की पत्नी उनके डायग्नोस्टिक सेंटर की पार्टनर हैं और उनके खाते से 3,60,000 का निवेश हुआ है। इस पर बाकायदा बैंक स्टेटमेंट भी दिखाया गया। मगर यहीं सवाल खड़े हो गए कि एक पदस्थ प्रशासनिक अधिकारी की पत्नी उसी जनपद में व्यवसाय कैसे कर सकती हैं, जहां उनके पति कार्यरत हैं ? क्या यह प्रत्यक्ष हितों का टकराव और पद के प्रभाव का इस्तेमाल नहीं माना जाएगा ?

एडीएम-हॉस्पिटल रिश्ते पर हंगामा: शराब की बोतल और सत्ता का साया, सवालों में प्रशासन

सोशल मीडिया पर वायरल एक तस्वीर में एडीएम राजेश वर्मा शराब की बोतल हाथ में पकड़े नजर आ रहे हैं। इस पर सफाई देते हुए अरुणेश पटेल ने कहा “शराब मैं पी रहा था। उन्होंने बस बोतल उठाकर ब्रांड का नाम पूछा था।” लेकिन क्या एक वरिष्ठ अधिकारी का ऐसा फोटो सार्वजनिक रूप से आना अपने आप में नैतिक आचरण का उल्लंघन नहीं है ?

एडीएम-हॉस्पिटल रिश्ते पर हंगामा: शराब की बोतल और सत्ता का साया, सवालों में प्रशासन

अरुणेश पटेल ने दावा किया कि उनका और एडीएम वर्मा का सजातीय रिश्ता नहीं, बल्कि पुराने क्लासमेट हैं। मगर प्रश्न यह है कि जब दोस्ती इतनी गहरी है, तो क्या एडीएम की मौजूदगी का लाभ व्यवसाय को नहीं मिला ? जब शिव कृष्ण मल्टी स्पेशलिटी हास्पिटल को सीज किया गया था, तो वह बिना अनुमति कैसे फिर से खुल गया ? क्या उच्चाधिकारियों के प्रभाव से यह संभव हुआ ? खुलासा हुआ है कि अस्पताल का रजिस्ट्रेशन इसी माह कराया गया जबकि संचालन वर्षों से हो रहा है! जमीन ग्रीनलैंड श्रेणी की है और बिना नक्शा पास कराए निर्माण हुआ। फ्री होल्डिंग की प्रक्रिया अधूरी होने के बावजूद व्यापार चल रहा है।

 

एडीएम-हॉस्पिटल रिश्ते पर हंगामा: शराब की बोतल और सत्ता का साया, सवालों में प्रशासन

इन सभी बिंदुओं पर सीएमओ कार्यालय और विकास प्राधिकरण की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। प्रकरण पर एडीएम राजेश वर्मा का कहना है कि यह पूरी मुहिम उन्हें बदनाम करने के लिए चलाई जा रही है। लेकिन जनता और मीडिया की नजर में सवाल यह है कि क्या सिर्फ सफाई देकर नैतिक जवाबदेही से बचा जा सकता है ? क्या एक अफसर का परिवार उस ज़िले में व्यापार कर सकता है, जहां वह स्वयं पदस्थ है ? यह मामला सिर्फ व्यक्तिगत या राजनीतिक नहीं, बल्कि प्रशासनिक नैतिकता, पारदर्शिता और नियमों की हत्या का प्रतीक बन गया है। अगर आरोप सही हैं, तो यह प्रशासनिक भ्रष्टाचार का खुला उदाहरण है !

 

 

 

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh

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