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बांदा में बाढ़ का संभावित कहर: नदिया उफान में, प्रशासन की तैयारियां फेल !
उत्तर प्रदेश

बांदा में बाढ़ का संभावित कहर: नदिया उफान में, प्रशासन की तैयारियां फेल !

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh

  • शरद मिश्रा

बांदा। जिले में बाढ़ का संकट तेजी से गहराता जा रहा है। मध्यप्रदेश की ओर हो रही लगातार बारिश के चलते केन और यमुना नदियां रौद्र रूप में आ गई हैं। शुक्रवार को करीब ढाई लाख क्यूसिक पानी दोनों बांधों से केन नदी में छोड़ा गया, जिससे जलस्तर में दो मीटर की और वृद्धि हो गई। यमुना भी खतरे के निशान की ओर सरक रही है। परिणामस्वरूप जिले के करीब 20 गांवों का संपर्क पूरी तरह टूट गया है।

बांदा में बाढ़ का संभावित कहर: नदिया उफान में, प्रशासन की तैयारियां फेल !

सबसे चिंताजनक पहलू यह रहा कि प्रशासन की ओर से कहीं भी चेतावनी, बैरिकेडिंग या नावों की सुरक्षा व्यवस्था नहीं की गई। सिंधनकला, तुर्री नाला रपटा रात के अंधेरे में डूब गया, लेकिन न कोई सुरक्षा घेरा बना, न नाव का इंतजाम हुआ। लोग सिर पर सामान और बच्चों को गोद में लेकर बाढ़ के पानी से खुद रास्ता बना रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि बाइक सवार जान हथेली पर रखकर बाढ़ के तेज बहाव से गुजर रहे हैं। डूबे रपटे के चलते सिंधन कला, पंडवान डेरा, तगड़ा डेरा, बिलहटी डेरा, गुरगवां, लसड़ा, बसधरी, अदरी समेत कई गांवों का संपर्क पूरी तरह से टूट चुका है।

बांदा में बाढ़ का संभावित कहर: नदिया उफान में, प्रशासन की तैयारियां फेल !

चंद्रावल नदी में चल रही नावों में न सपोर्ट लाइफ जैकेट है, न ट्यूब, न टॉर्च। नाविक देवीदीन, छोटे लाल और बलबीर ने बताया कि सुबह 6 बजे से शाम 7 बजे तक नाव चलती हैं, लेकिन सुरक्षा के नाम पर कुछ नहीं दिया गया। छात्र-छात्राएं भी नावों से बिना किसी सुरक्षा के जसपुरा पढ़ने जाते हैं। खप्टिहाकला के नाविक शंकर निषाद और भूरा निषाद ने बताया कि प्रशासन ने ग्रामीणों को तो लाइफ जैकेट पर नाव में लाने की अनुमति दी है, लेकिन बच्चों को नाव में बैठाने से मना कर दिया गया है। चार से पांच दिन तक छात्र नाव से स्कूल नहीं आ पाएंगे।

बांदा में बाढ़ का संभावित कहर: नदिया उफान में, प्रशासन की तैयारियां फेल !

एसडीएम पैलानी ने दावा किया कि “बाढ़ प्रभावित इलाकों पर लगातार नजर है, लेखपाल से लेकर सचिव तक लगे हैं, हर जानकारी डीएम को भेजी जा रही है।” लेकिन जमीनी हालात साफ बताते हैं कि प्रशासन सिर्फ दावों में सक्रिय और राहत में निष्क्रिय है। खास बात यह है कि एसडीएम ने स्वयं दौरा करने से परहेज करते हुए ज़िम्मेदारी “राधेश्याम सिंह” पर डाल दी है। यह रवैया ऐसे समय में लापरवाही की श्रेणी में आता है जब ग्रामीण बाढ़ के बीच जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं।

 

 

 

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