
- विनोद मिश्रा
बांदा। जिला पंचायत की राजनीति इस समय ‘भ्रष्टाचार, बौखलाहट और जातिगत सियासत’ के दलदल में फंसी हुई है। केन्द्र में हैं जिला पंचायत अध्यक्ष सुनील पटेल, जिन पर छह करोड़ 21 लाख रुपये के घोटाले का गंभीर आरोप हैं। शासन द्वारा गठित जांच समिति की रिपोर्ट में सुनील पटेल को दोषी पाया गया, अब जब सच सामने आ गया है तो उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और सदर विधायक प्रकाश द्विवेदी को कटघरे में खड़ा करने का नया ड्रामा शुरू कर दिया है !

जांच की आँच जब कुर्सी तक पहुँची, तो अध्यक्ष सुनील ने ‘राजनीतिक शहीद’ बनने की पटकथा लिखनी शुरू कर दी ! कभी पिछड़ी जाति का हवाला, कभी अफसरों की अनसुनी और अब मुख्यमंत्री और विधायक को बदनाम करने की संगठित कोशिश ? लेकिन यह सारा घटनाक्रम अब जिले की जनता के सामने एक ‘घड़ियाली आंसुओं वाली चालबाज़ी’ की तरह सामने आ रहा है ! जांच में खुलासा हुआ कि जिला पंचायत में खनिज तहबाजारी आदि के जरिए करीब 6.21 करोड़ रुपये की सरकारी धनराशि का गबन किया गया ! महोबा जिलाधिकारी द्वारा संस्तुत जांच रिपोर्ट में अध्यक्ष सुनील पटेल की भूमिका को पूरी तरह से दोषपूर्ण बताया गया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए थे। रिपोर्ट सामने आते ही भाजपा संगठन से लेकर जिला प्रशासन तक में हलचल मच गई। यह पहली बार था जब भाजपा शासित जिले में अपने ही जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ इतनी कठोर जांच रिपोर्ट सामने आई। जांच में दोषी पाए जाने के बाद सुनील पटेल ने पलटवार करते हुए कहा कि “मुख्यमंत्री के निर्देशों के बावजूद उनके अधीनस्थ अधिकारियों ने बात नहीं सुनी”, और सारा काम विधायक प्रकाश द्विवेदी के इशारों पर हुआ। यह आरोप न केवल “राजनीतिक तौर पर बचकाना, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया का अपमान भी माना” जा रहा है!

सदर विधायक प्रकाश द्विवेदी ने साफ कहा “मैंने कभी इस मामले की शिकायत” नहीं की। जिला “पंचायत के ही सदस्यों ने भ्रष्टाचार के दस्तावेज़ दिए” थे। विधायक ने चुनौती दी “अगर मैं दोषी हूं तो मेरी भी जांच हो जाए। भाजपा के अंदरूनी हलकों में भी अब “सुनील पटेल की छवि दागदार अध्यक्ष के रूप में उभर” रही है ! पार्टी में चर्चा है कि जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद “सुनील मानसिक संतुलन सा खो” बैठे हैं ? जातिगत सहानुभूति का कार्ड खेलकर पार्टी नेतृत्व को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं? कई वरिष्ठ पदाधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर कहा “यह स्पष्ट रूप से अपनी गर्दन बचाने के लिए झूठ का सहारा लेने की कोशिश” है। इससे न केवल संगठन की छवि धूमिल हो रही है, बल्कि सीएम और विधायक जैसे ईमानदार चेहरों पर भी उंगली उठ रही है !”

सुनील पटेल द्वारा यह कहना कि “उन्हें इसलिए टारगेट किया गया क्योंकि वे पिछड़ी जाति से आते हैं”, यह नौटंकी जनता के बीच भारी विरोध और आक्रोश का कारण बन गया है। शहर और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में लोग यह सवाल कर रहे हैं “क्या भ्रष्टाचार करने वालों को अब जाति के नाम पर बचाया” जाएगा ? प्रबुद्ध नागरिकों का कहना है कि “जब पैसे लूटे जा रहे थे,त ब तो जाति याद नहीं आई। अब पकड़ में आए तो ‘जाति की राजनीति’ शुरू ? ये शर्मनाक है !
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