City News Uttar Pradesh
बुंदेलखंड से मिटता 'परसन बादशाह': विक्टोरिया का पसंदीदा चावल अब विलुप्ति की कगार पर
उत्तर प्रदेश

बुंदेलखंड से मिटता ‘परसन बादशाह’: विक्टोरिया का पसंदीदा चावल अब विलुप्ति की कगार पर

विनोद कुमार मिश्रा ( सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश )

  • विनोद मिश्रा

बांदा। कभी महलों की शान रहा, अब खेतों से गायब हो रहा है। बुंदेलखंड की धरा से उपजा ‘परसन बादशाह’ चावल, जो अपनी बेमिसाल खुशबू और स्वाद से महारानी विक्टोरिया तक की थाली में परोसा गया, आज बांदा की धरती से मिटने की कगार पर है। बांदा गजेटियर के पन्नों में दर्ज ये गौरव अब सिर्फ किस्सों और यादों में बचा है। धान के ‘सुगंधी सम्राट’ का यह हाल किसानों की नई किसानी संस्कृति, रासायनिक खाद की अंधाधुंध होड़ और बाजार की बदलती प्राथमिकताओं की देन है।

बुंदेलखंड से मिटता 'परसन बादशाह': विक्टोरिया का पसंदीदा चावल अब विलुप्ति की कगार पर

अतर्रा कस्बा, जिसे कभी ‘धान का कटोरा’ कहा जाता था, वहां महा चिन्नावर और परसन बादशाह जैसे सुगंधित चावल की खुशबू सिर्फ खेतों तक नहीं, बल्कि विदेशों तक जाती थी। स्थानीय बुजुर्ग किसान याद करते हैं “वो दौर था जब एक मालगाड़ी चावल से लदकर रोज़ विदेश रवाना होती थी। ट्रक व्यापारी गांव-गांव डेरा डाले रहते थे। किसान का घर गोदाम था और धान उसकी पहचान!” लेकिन आज न वो महक है, न वो रौनक। यूरिया और डीएपी की अधिकता ने मिट्टी की प्राकृतिक सुगंध छीन ली।

बुंदेलखंड से मिटता 'परसन बादशाह': विक्टोरिया का पसंदीदा चावल अब विलुप्ति की कगार पर

उत्पादन कम और लागत ज्यादा यह व्यावसायिक किसानों को दूर कर रहा है। नई प्रजातियों की बाढ़ और तेज़ बढ़ते हाइब्रिड बीजों के प्रचार ने देसी बीजों को किनारे लगा दिया है। परसन बादशाह की पैदावार सामान्य धान की तुलना में कम होती है, लेकिन उसकी बाजार में मांग और कीमत कहीं अधिक थी। मगर आज का किसान कम समय, ज्यादा उत्पादन और गारंटीड बिक्री के चक्कर में अपनी जड़ों से कटता जा रहा है।

बुंदेलखंड से मिटता 'परसन बादशाह': विक्टोरिया का पसंदीदा चावल अब विलुप्ति की कगार पर

खेती अब परंपरा नहीं, सिर्फ व्यापार बन गई है। रासायनिक खादों और मशीनीकरण ने ‘मिट्टी से रिश्ता’ तोड़ दिया। गोबर की खाद और हाथों से की गई खेती की वो पुरानी पद्धति ही थी, जो परसन बादशाह को खास बनाती थी। बांदा कृषि विभाग के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा “हमारे पास पारंपरिक धान के बीजों को संरक्षित करने की कोई ठोस योजना नहीं है। सरकार का फोकस हाई-यील्डिंग वैरायटीज़ पर है।” अगर यही हाल रहा, तो वो दिन दूर नहीं जब परसन बादशाह सिर्फ किताबों और भोजनों के स्मरण में जिंदा रहेगा। यह न सिर्फ किसान की सांस्कृतिक विरासत, बल्कि बांदा की कृषि पहचान का भी अपमान होगा।

 

 

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh

 
 



Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh
 





 

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh
 
Subscribe to us on Youtube to watch the latest video news updates.

Notice: This report has been updated by City News Uttar Pradesh , . Full responsibility for the content of this report rests with City News Uttar Pradesh . Neither www.citynewsuttarpradesh.in nor the Editorial Board bears any responsibility.

Related News

डीएम का अफसरों को अल्टीमेटम: राजस्व वसूली में नहीं चलेगी सुस्ती, विभागों की कसी ‘नकेल’

City News Uttar Pradesh

Banda : एफसीआइ अतर्रा के धान क्रय केंद्र में मनमानी, जांच की मांग …

City News Uttar Pradesh

भाजपा माईक्रो डोनेशन अभियान में कामयाब : तीस हजार लोगों नें चंदा दे पूरा किया लक्ष्य

पत्नी को पीटा: फिर स्वयं को फांसी लगा समाप्त कर ली जीवन लीला

City News Uttar Pradesh

बांदा में ‘ढोंग’ की हरियाली भारी: पर्यावरण दिवस पर भाषण, फोटोग्राफी और खाना-पूरी

City News Uttar Pradesh

विधायक प्रकाश द्वारा ‘विकास कार्यो’ की ‘जमीनी पड़ताल: लापरवाही पर ‘फटकार’

City News Uttar Pradesh
ब्रेकिंग न्यूज़