
- विनोद मिश्रा
बांदा। जिले में चकबंदी प्रक्रिया लागू हुए पांच दशक से ऊपर हो गये। इसकी हालत “नौ दिन चले अढ़ाई कोस” है। 30 से अधिक गांव की न तो चकबंदी प्रक्रिया पूरी हुई और न ही धारा 52 का प्रकाशन हुआ। जिससे विवाद बढ़ते गए और भूमि विवाद से संबंधित 3000 से अधिक मामले चकबंदी न्यायालय में लंबित हैं।

जिले में चकबंदी प्रक्रिया वर्ष 1972 में शुरू हुई थी। पहले चरण में जिले के 761 राजस्व गांवों को शामिल किया गया था। विभाग की मानें तो 725 गांवों की चकबंदी प्रक्रिया पूरी होने के बाद धारा 52 का प्रकाशन हो गया था। इसके बाद भी 39 गांव शेष रह गए थे। दूसरे चरण में वर्ष 2014-15 में 52 नए गांव इसमें और शामिल कर दिए गए।

इस प्रकार 91 गांवों की चकबंदी प्रक्रिया फिर शुरू हुई, लेकिन अभी तक 61 गांवों की ही चकबंदी पूरी कर धारा 52 का प्रकाशन किया गया। 30 गांव अभी भी शेष हैं। इधर, तीसरे चरण में 2023 में 22 नए और गांव को शामिल करने के लिए शासन को पत्र भेजा गया है।

इस प्रक्रिया के तहत किसानों में बिखरे हुए खेतों को एक स्थान पर एकत्र करने और सुलह समझौते से भूमि विवादों का निस्तारण करना मुख्य उद्देश्य है, लेकिन यह प्रक्रिया बहुत धीमी गति से चल रही है, जिससे गांवों में भूमि विवाद बढ़ रहे हैं। भूमि विवाद से संबंधित 3000 से अधिक मामले इस समय चकबंदी न्यायालय में लंबित है। कई गांव में तो कागजी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है लेकिन किसानों को अभी तक चक नहीं मिले हैं।
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