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- शरद मिश्रा
मिल्कीपुर। उत्तर प्रदेश के मिल्कीपुर विधानसभा उपचुनाव में भाजपा ने ऐतिहासिक जीत दर्ज कर विपक्षी दलों को करारा झटका दिया है। भाजपा प्रत्याशी चंद्रभान पासवान ने समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार को बड़े अंतर से हराकर यह साबित कर दिया कि प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार की नीतियों को जनता का भरपूर समर्थन मिल रहा है।

– सपा की पिछड़ा-दलित गठजोड़ की रणनीति हुई बेअसर
समाजवादी पार्टी इस चुनाव में “पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक” वोट बैंक के सहारे मैदान में उतरी थी, लेकिन यह दांव पूरी तरह असफल साबित हुआ। 70,000 यादव और 35,000 मुस्लिम मतदाताओं के समर्थन की उम्मीद में उतरी सपा अपने पारंपरिक वोट बैंक को भी नहीं बचा सकी। 2022 विधानसभा चुनाव की तुलना में इस बार सपा को 19,218 वोट कम मिले। वहीं, लोकसभा चुनाव में मिली बढ़त को भी बरकरार रखने में पार्टी असफल रही।

– भाजपा ने साधा हर वर्ग का समर्थन
भाजपा ने दलित और सवर्ण मतदाताओं को साधने की जो रणनीति अपनाई, उसने पार्टी को बड़ी जीत दिलाई। केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं, कानून व्यवस्था और विकास के मुद्दों ने मतदाताओं को भाजपा की ओर आकर्षित किया। खासतौर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की व्यक्तिगत छवि और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों का सकारात्मक प्रभाव इस चुनाव में देखने को मिला।
– राम मंदिर मुद्दे पर भी पड़ा असर
फैजाबाद लोकसभा चुनाव में भाजपा को मिली हार के बाद पार्टी ने इस उपचुनाव को जीतने के लिए पूरी ताकत झोंक दी। राम मंदिर निर्माण के बाद भी फैजाबाद लोकसभा सीट पर हार की टीस भाजपा ने इस जीत से पूरी कर ली। पार्टी के रणनीतिकारों ने मतदाताओं को यह समझाने में सफलता पाई कि भाजपा ही विकास और स्थिरता की गारंटी है।

– सपा को नहीं मिला अन्य जातियों का समर्थन
सपा ने दलितों को रिझाने के लिए बड़े दावे किए, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही निकली। पार्टी पासी समाज को लामबंद करने में नाकाम रही। सवर्ण मतों में सेंध लगाने के लिए सपा ने ब्राह्मण नेताओं को प्रचार में लगाया, लेकिन इसका भी कोई खास असर नहीं हुआ। इसी तरह क्षत्रिय मतदाताओं को लुभाने की कोशिशें भी नाकाम रहीं।
– क्या कहते हैं राजनीतिक विश्लेषक ?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस चुनाव में भाजपा की जीत का सबसे बड़ा कारण पार्टी की मजबूत संगठनात्मक पकड़ और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की लोकप्रियता रही। वहीं, सपा की रणनीति में स्पष्टता की कमी और जातिगत समीकरणों पर अत्यधिक निर्भरता उसके लिए घातक साबित हुई। मिल्कीपुर उपचुनाव के नतीजों ने यह साफ कर दिया कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में भाजपा का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है।
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