- विनोद मिश्रा
बांदा। निलंबित जेई रामभवन मामले में समय पर चार्जशीट अदालत में दाखिल करने को लेकर अब सीबीआइ चिंतित है। रिमांड पर दिल्ली ले जाकर जेई की शारीरिक व मानसिक जांच के साथ वॉयल सैंपल के जरिए मजबूत साक्ष्य जुटाने में देरी होने से इसमें दिक्कतें तय हैं। सोमवार को अधिवक्ता के निधन के कारण सुनवाई नहीं होने से टीम फिर मायूस नजर आई।

सोमवार को सीबीआइ के डिप्टी एसपी अमित कुमार ने जिला जज से भी मुलाकात की। करीब 20 मिनट बाद वापस लौटे। उससे पहले उन्होंने मोबाइल पर किसी से बात की। तेज कदमों के साथ आवाजाही से सीबीआइ की बेकरारी साफ नजर आई। सोमवार अपराह्न करीब 1.40 बजे सीबीआइ के डिप्टी एसपी अमित कुमार चार सदस्यीय टीम के साथ कोर्ट पहुंचे। शासकीय अधिवक्ता मनोज दीक्षित के साथ सीधे अपर सत्र न्यायाधीश पंचम की अदालत पहुंचकर बातचीत की। टीम के सदस्यों में चर्चा रही कि आरोपित निलंबित जेई रामभवन के केस की चार्जशीट 90 दिनों के अंदर दाखिल करनी है। इससे पहले सभी साक्ष्य जुटाने हैं। रिमांड मिलने के बाद ही दिल्ली के एम्स में उसका मेडिकल कराया जा सकता है। वॉयस सैंपल भी वहीं लिया जाना है। इस लिहाज से समय बीत रहा है और जांच की गति नहीं बढ़ पा रही है।
चिकित्सकों का बन चुका पैनल
सीबीआइ सूत्र बताते हैं कि एम्स में जेई के मेडिकल, वॉयस सैंपल और ब्लड टेस्ट के लिए चिकित्सकों का पैनल भी बन गया है। वॉयस सैंपल जांच में वो सदस्य भी शामिल हैं, जिन्होंने अभिनेता सुशांत की मौत के मामले में जांच की है।
आरोपित का जेल में करीब डेढ़ माह गुजरा समय
16 नवंबर को गिरफ्तारी के बाद आरोपित निलंबित जेई को बांदा जेल भेजा गया था। उसके बाद पांच दिन की रिमांड मिली थी, जिसमें पूछताछ व जांच के दौरान काफी साक्ष्य जुटाए गए थे। इस दौरान करीब डेढ़ माह का समय आरोपित का जेल में ही बीता।

( शरद मिश्रा- संपादक )
( सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश )



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