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बुंदेलखंड का मशहूर वीर रस दीवारी नृत्य : पूरे देश में है इसकी विशिष्ट पहचान
उत्तर प्रदेश

बुंदेलखंड का मशहूर वीर रस दीवारी नृत्य : पूरे देश में है इसकी विशिष्ट पहचान

  • विनोद मिश्रा

बांदा। बुन्देलखण्ड की मिट्टी में अभी भी पुरातन परम्पराओं की महक रची बसी है। यहां की दिवारी समूचे देश में अनूठी है।पौराणिक किवदंतियों से जुड़ी धार्मिक पवरम्पराओं के परिवेश में पूरे बुन्देलखण्ड में दीप मालिका पर्व पर दीवारी गायन-नृत्य और मौन चराने की अनूठी परंपरा देखती ही बनती है। यहां दीवाली के मौके पर मौन चराने वाले “मौनिया” ही सर्वाधिक आकर्षण का केन्द्र होते हैं।

बुंदेलखंड का मशहूर वीर रस दीवारी नृत्य : पूरे देश में है इसकी विशिष्ट पहचान
Famous Veer Ras Walli dance of Bundelkhand: Its unique identity is in the whole country

मौन चराने वाले मौनियों के अनुसार द्वापर युग से प्रचलित इस परम्परा के अनुसार विपत्तियों को दूर करने के लिए ग्वाले मौन चराने का कठिन व्रत रखते हैं। यह मौन व्रत बारह वर्ष तक रखना पड़ता है। तेरहवें वर्ष में मथुरा व वृंदावन जाकर मौन चराना पड़ता है, वहां यमुना नदी के तट पर बसे विश्राम घाट में पूजन का व्रत तोड़ना पड़ता है। परम्परा के अनुसार मौन चराने वाले लोग दीपावली के दिन यमुना घाट में स्नान करते हैं।

बुंदेलखंड का मशहूर वीर रस दीवारी नृत्य : पूरे देश में है इसकी विशिष्ट पहचान
Famous Veer Ras Walli dance of Bundelkhand: Its unique identity is in the whole country

कुछ लोग यमुना-बेतबा के संगम स्थल एवं चित्रकूट में मंदाकिनी में स्नान करने ट्रेन से जाते हैं फिर विधि पूर्वक पूजन कर पूरे नगर में ढोल नगाड़ों की थाप पर दीवारी गाते, नृत्ये करते हुए अपने गंतव्य पहुंचते हैं। इस दिन मौनिया श्वेत धोती ही पहनते हैं और मोर पंख के साथ-साथ बांसुरी भी लिए रहते हैं। मौनिया व्रत की शुरुआत सुबह गौ पूजन से होती है। इसके बाद वे गौ-माता व श्रीकृष्ण भगवान का जयकारा कर मौन धारण कर लेते हैं। दीवारी गाने वाले सैकड़ों ग्वाले लोग गांव नगर के संभ्रांत लोगों के दरवाजे पर पहुंचकर लाठियों से दीवारी खेलते हैं। उस समय युद्ध का सा दृश्य होता है।

Ramkesh Nishad (Minister of State for Jal Shakti, Government of Uttar Pradesh)

लोग एक साथ लाठी से प्रहार और बचाव करते हैं। चट-चटाचट चटकती लाठियों के बीच दीवारी गायक जोर-जोर से दीवारी गीत गाते हैं और ढ़ोल बजाकर वीर रस से युक्त ओजपूर्ण नृत्य का प्रदर्शन करते हैं। नृत्य में धोखा होने से कई बार लोग चुटहिल भी हो जाते हैं, लेकिन परम्पराओं से बंधे ये लोग इसका कतई बुरा नहीं मानते। इन्हीं अनूठी परम्पराओं के चलते बुन्देलखण्ड की दीवारी का पूरे देश में विशिष्ट स्थान व अनूठी पहचान है।

 

 

 

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh

 
 



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