- विनोद मिश्रा
बांदा। “दगाबाजी” आर्थिक कमर तोड़ रहीं हैं। मौसम बांदा जिला में लगभग हमेशा खेती- किसानी से “दगाबाजी” करता हैं। किसानों का उसपर से भरोसा उठ सा गया हैं। वह यह कहने को मजबूर हो गया है की “दगाबाज तेरी बतिया न मानू रे”।

इस वर्ष भी मानसून पतला रहा। “बरखा रानी” की “मेहरबानी” न होने से फसलें सूख रही हैं। एक यही हाल रहा तो तो करीब 60 प्रतिशत फसल नष्ट हो जाएगी। जुलाई माह में बारिश हुई तो किसानों ने कर्ज लेकर खेतों में बीज बो दिया। धान की बेड़ लगा दी, अब सिंचाई के अभाव में फसलें सूखने रहीं हैं। किसानों के सामने फसल बचाने का संकट है। कुछ किसान निजी नलकूपों से फसल को बचा रहे हैं। जो “मौसम” सहारे हैं वह पानी को परेशान हैं।

हालांकि शासन नें राजस्व विभाग व कृषि विभाग की संयुक्त टीम को गांव-गांव नुकसान के सर्वे का काम शुरू कर दिया है। जल्दी संयुक्त टीम रिपोर्ट डीएम के माध्यम से पसरकार को भेजेंगी। मौसम विभाग के पूर्वानुमान फेल साबित हुए हैं। जुलाई व अगस्त में बारिश हुई, लेकिन सितंबर में यह दगा दे गई। पिछले चार माह में औसत 809.65 मिलीमीटर (मिमी) बारिश होनी चाहिए, पर 497.29 मिलीमीटर बारिश हुई है। बांदा में औसत बारिश 850.60 मिमी के सापेक्ष 312 मिमी बारिश हुई। यानी औसत से 74 फीसदी बारिश कम दर्ज की गई।
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