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बांदा में छाया काली मौत का छाया : तीन मौतों से दहशत, काफी संख्या में अभी शिकंजा !
उत्तर प्रदेश

बांदा में छाया काली मौत का छाया : तीन मौतों से दहशत, काफी संख्या में अभी शिकंजा !

  • विनोद मिश्रा

बांदा। जिले में काली मौत के बादल छा गये है। तीन लोगों को काली बीमारी लील चुकी है। कुछ का इलाज चल रहा है। स्वास्थ विभाग में हड़कंप की स्थिति है। जिले की बड़ोखर तहसील के त्रिवेणी गांव में संक्रामक बीमारी काली खांसी (डिप्थीरिया) से 11 दिन में तीन बच्चों की मौत हो गई तीसरे बच्चे की चार दिन पहले हुई मौत के बाद सीएमओ डॉ. एके श्रीवास्तव के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव पहुंची। बीमार बच्चों की जांच की। जरूरतमंदों को दवाएं बांटी गई ।


सीएमओ ने बताया कि एक बच्चे की मौत के बाद लखनऊ से जांच रिपोर्ट आई है। लक्षणों के आधार पर माना जा रहा है कि सभी मौतें काली खांसी से हुई हैं। शासन को रिपोर्ट भेजी जा रही है। स्वास्थ्य टीम ने यहां दो सौ मरीजों का परीक्षण किया। सूची तैयार की गई । काली खांसी लक्षण वाले सात बच्चों का नमूना जांच के लिए भेजा गया है। 27 लोगों की मलेरिया की स्लाइड बनी है।

बांदा में छाया काली मौत का छाया : तीन मौतों से दहशत, काफी संख्या में अभी शिकंजा !
Shadow of black death in Banda: Panic due to three deaths, a lot of screws still!

मजदूरी दिलीप यादव के पुत्र अंशुल (4) को मौत से हफ्ते भर पहले बुखार आया था। उसके गले में दर्द था। पहले जिला अस्पताल से दवा कराई। फिर मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया। आठ अगस्त को हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने उसे रेफर कर दिया। नौ अगस्त को परिजन अंशुल को लेकर एक निजी अस्पताल आ गए। यहां डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया। डॉक्टर ने काली खांसी से मौत बताई। इसकी लखनऊ से जांच रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई थी।


इसी क्रम में बच्चा वर्मा के पुत्र उमंग (10) की बुखार से 12 अगस्त को हालत बिगड़ गई। उसे जिला अस्पताल और फिर मेडिकल कॉलेज में दिखाया। 14 अगस्त को डॉक्टर ने हालत गंभीर बताकर रेफर कर दिया। घरवाले उमंग को कानपुर ले गए। 15 अगस्त को हैलट में इलाज के दौरान मौत हो गई। तीसरी मौत अनिल विश्वकर्मा के पुत्र अंश (10) की 20 अगस्त को दोपहर में हुई। उसे बुखार के साथ गले में दिक्कत थी। कानपुर के अस्पताल में उसकी मौत हुई।

उसके दो भाई प्रांशु (3) व हिमांशु (डेढ़ वर्ष) और चचेरी बहन अंशिका (6) भी बुखार से ग्रसित हैं। उनका इलाज चल रहा है। प्रांशु व चचेरी बहन अंशिका की लार का नमूना जांच के लिए लखनऊ लैब भेजा गया है। पिता अनिल ने बताया कि आठ अगस्त को तबीयत बिगड़ी थी। गांव के ही करीम खां का बेटे मुस्तफा (10) और बेटी रवीना (8) की हालत भी गंभीर है। दोनों का इलाज हैलट में चल रहा है। उन्हें बुखार के साथ गले में दिक्कत है। सूजन से सांस लेने में परेशानी है। यहां कई और बीमार हैं।

 

 

 

 
 



Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh
 





 

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