- विनोद मिश्रा
बांदा। हत्या के विचाराधीन मामले में लंबे समय से साक्ष्य नहीं देने पर अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम मो. अशरफ अंसारी सोमवार को बेहद खफा हुए। उन्होंने वर्तमान में रायबरेली यूपी 112 में तैनात दारोगा के खिलाफ तल्ख टिप्पणी की।

एसपी रायबरेली को निर्देश दिए कि कार्यमुक्त करने के बाद गिरफ्तार कर दारोगा को कोर्ट में पेश किया जाए। साथ ही उनका वेतन रोक दिया जाए। जब तक उपस्थित होकर साक्ष्य का प्रमाण पत्र न पेश करें, वेतन नहीं दिया जाए। इसी मामले में जसपुरा प्रभारी निरीक्षक को पूर्व आदेशों का पालन नहीं करने पर प्रकीर्ण वाद दर्ज कर तीन दिन में स्पष्टीकरण देने का आदेश दिया।
अपर जिला शासकीय अधिवक्ता सुशील तिवारी ने बताया कि जसपुरा के बबलू तिवारी व श्रीराम तिवारी हत्या के एक मामले में 2016 से जेल में बंद हैं। मामले के निस्तारण के लिए आरोपितों ने हाईकोर्ट की शरण ली थी। उच्च न्यायालय ने जल्द निस्तारण के निर्देश दिए थे। हाईकोर्ट ने निर्देश दिया था कि थानाध्यक्ष व्यक्तिगत रुचि लेकर सुनवाई में सहयोग करें। परंतु थानाध्यक्ष ने हाईकोर्ट के आदेश को गंभीरता से नहीं लिया और न ही न्यायालय के आदेशों का सम्मान कर रहा है।

न्यायाधीश ने दारोगा पंकज तिवारी (वर्तमान समय रायबरेली में यूपी 112 में तैनात हैं) के खिलाफ गैर जमानतीय वारंट व 350 की नोटिस जारी की। साथ ही एसपी रायबरेली को आदेश दिया कि साक्षी (दारोगा पंकज) को कार्यमुक्त करते हुए गिरफ्तार कर न्यायालय में उपस्थित करें। जसपुरा थानाध्यक्ष को निर्देश दिया कि पूर्व आदेशों का अनुपालन करें। साक्षी को विशेष वाहक से आदेश का तामीला न कराए जाने पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर स्पष्टीकरण दें।
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