- विनोद मिश्रा
बांदा। ज़िले के कोलावल रायपुर बालू खदान में मानसून सक्रिय होने के पहले अवैध खनन का “कोलाहल चरमोत्कर्ष” पर पहुंच गया है, पर प्रशासन चैन की वंशी बजा रहा है। मुख्य मंत्री योगी के अवैध खनन रोकने के आदेश यहां बालू माफियाओं के सामने नतमस्तक से लगते हैं ! प्रशासनिक अमला बालू माफियाओं का “टुकड़ खोर” के नाम से “बदनाम” हो रहा हैं,आश्चर्य यह कि इन आरोपों को नजर अंदाज कर “फिर भी चैन की वंशी” ! “वाह भाई वाह”,“कुछ न कुछ तो तो दाल में काला है” ?

नरैनी तहसील की कोलावल रायपुर खदान में खनन क्षेत्र से हटकर जिस प्रकार भारी -भरकम मशीनों से खनन हो रहा है उससे तो लगता है कि “दाल में कुछ काला नहीं बल्कि पूरी की पूरी दाल ही काली है” ?

खदान में नियमों का उल्लंघन करके बालू का खनन चल रहा है। एनजीटी के आदेश अनुसार खदानों में भरी मशीनों से खनन नहीं होगा। उच्च न्यायालय के निर्देश पर प्रदेश सरकार ने 5 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल वाले खनन क्षत्रों पर खनन की रोक लगा रखी है। कोलावल रायरपुर खदान में बालू खनन सारे नियमों के विपरीत अवैध रूप से चल रहा है !

ग्रामीण खामोशी से इशारे -इशारे में बताते है कि बालू के इस खदान का जो मालिक है उसकी पकड़ लेखपाल से लेकर राज्य पाल तक है। अक्सर उसकी बैठकें और पार्टी प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के साथ होती रहती हैं , जिसके चलते मुख्य मंत्री के सख्त आदेश नजर अंदाज कर दिये गये हैं ?
जिम्मेदार प्रशासन एक भोजपुरी कहावत “चूंहका -चूंहका बाबाजी” यानी काटो “मलाई” में मद मस्त हैं। राजस्व को रोजाना लगभग दस लाख के राजस्व को चूना लग रहा हैं। ओवरलोड परिवहन पर कोई रोक नजर नहीं आती। सबके दाम और काम बंधे हुये हैं ?
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