- विनोद मिश्रा
बांदा। शासनादेश का पालन कराने में सख्त डीएम अनुराग पटेल को बिना संज्ञान में लिये जे. एन महाविद्यालय के मैदान में केन महोत्सव मेला के नाम से प्रदर्शनी चलना आश्चर्य जनक बना हुआ है! यह पूरी तरह नियम के विरुद्ध है। स्कूल, कालेज के परिसर, मैदान में केवल छात्रों के हितों से सम्बंधित कार्यक्रम जैसे शैक्षिक, खेल कूद, बौद्धिक विकास जैसे कार्य ही सकते हैं। ऐसा हम नहीं कह रहे बल्कि शासनादेश 960/15-9-12-2003(66)/2012/ दिनांक 29-6-2012 एवं 1008/15-9-2003(66)/2012 कह रहा है।
दिनांक 12 अक्टूबर 2012 के शासनादेश मे निहित प्रावधानो के तहत छात्रों के हितों के खेल कूद योग व्यायाम के अलावा किसी भी तरह के कार्यक्रमो पर रोक है !

किन्तु प्रशासन पता नहीं कैसे यहां प्रदर्शनी की अनुमति दे रखी है। इतना ही नहीं बिना किराया शुल्क के मैदान उपलब्ध करा दिया गया है। अभी 2022 के विधान सभा के चुनाव से पहले राजकीय इंटर कॉलेज मे यह प्रदर्शनी लगवा दी जब की शासनादेश के अनुसार रोक थी। वही चुनाव के चलते राजनीतिक सभा के लिए उक्त मैदान आरक्षित था, नतीजा प्रदर्शनी शुरू होते ही उप मुख्यमंत्री केसव प्रसाद की रैली लग गई। प्रशासन को मैदान खाली कराना पड़ा।

जब मैदान खाली करवाया गया तो आयोजक ने फिलहाल सामान कहा रखे की बात पर पं. जे. एन. कालेज के मैदान पर प्रदर्शनी का सामान रख लिया, पर कुछेक दिनों बाद उसी मैदान मे प्रदर्शनी लगा दी और पूरे दो माह सेअधिक समय से चल रही है , जिससे सुबह की सैर करने वालो को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सुबह की सैर, और योग के लिए आयुक्त ने जे. एन. कालेज को व्यवस्थित करवाया था, लाइट, सफाई, बगैरह बेहतर कर दी थी, पर प्रदर्शनी चल रही है। परेशानी सुबह की सैर वालो को है।

प्रदर्शनी, मेला इत्यादि के लिए प्रशासन ने सशुल्क जहीर क्लब मैदान सुरक्षित कर रखा है जहां प्रदर्शनी हेतु 3000 रुपया प्रति दिन लगते हैं, वही धार्मिक कार्य के लिए 1000 रुपया प्रतिदिन है, वर्तमान मे जहीर क्लब मैदान पर प्रदर्शनी संचालित है जिसका शुल्क 150000 रुपये सरकारी खाते मे जमा है, पर पं. जे. एन. कालेज वाला प्रदर्शनी आयोजक कभी भी मैदान का शुल्क जमा नही करता, आखिर क्यो ? शुल्क छूट क्यो ? और शासनादेश के विरुद्ध कालेज, स्कूल के मैदान क्यो दिये जाते हैं ? यक्ष प्रश्न है !

इस पर जांच होनी चाहिए और तत्काल प्रदर्शनी बंद हो, तथा पिछला और अभी तक का किराया क्षेत्रफल के हिसाब से बकाया राजस्व वसूली की तरह करना चाहिए ! वहां लकी ड्रा के नाम पर भी वसूली हो रही है, जबकि प्रदेश में जुआ, लाटरी पर पूरी तरह से रोक है।उम्मीद है जिलाधिकारी इस अनियमतता को खत्म कराने के लिये प्रभावी कदम उठाएंगे।
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