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बांदा गोवंश प्रकरण : आखिर किसके आदेश पर एआरटीओ ने उपलब्ध कराए दस ट्रक
उत्तर प्रदेश

बांदा गोवंश प्रकरण : आखिर किसके आदेश पर एआरटीओ ने उपलब्ध कराए दस ट्रक ?

 

  • विनोद मिश्रा

बांदा। नरैनी में चार दिसंबर को दस ट्रकों में गोवंशीय पशुओं को इकट्ठा कर मध्य प्रदेश के जंगल में छोड़ा गया और घायल गायों को जिदा दफना दिया गया। आखिर किसके निर्देश पर एआरटीओ ने ट्रकों की व्यवस्था कराई। फिलहाल इसमें ईओ के निलंबन के साथ अब एसडीएम को हटाया गया है। सीवीओ को भी बलि का बकरा बनाया जा रहा है। जबकि एआरटीओ पर कोई कार्रवाई नहीं हुई और न ही गाड़ियों की व्यवस्था कराने के निर्देश देने वाले पर ही कोई कार्रवाई की गई।


प्रत्यक्षदर्शी गोसेवकों का कहना है कि नरैनी की मोतियारी मंडी से 11 ट्रकों में गोवंशीय पशुओं को भरवाया गया। मौके पर थानाध्यक्ष, ईओ, एसडीएम और एआरटीओ मौके पर मौजूद रहे। एआरटीओ ने ट्रकों की व्यवस्था कराई। चार दिसंबर को घटना वाले दिन पशुपालन विभाग के निदेशक आए थे। इसलिए मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा.एसपी सिंह ने उन्हें लेने बेंदा गए थे। इसके बाद उनके साथ बैठकों में रहे।

बांदा गोवंश प्रकरण : आखिर किसके आदेश पर एआरटीओ ने उपलब्ध कराए दस ट्रक
Banda Govansh Case: After all, on whose orders ARTO provided ten trucks

गोवंशीय पशुओं को ट्रक में लदवाने के बाद एसडीएम ने स्थानयी पशु चिकित्साधिकारी को चलता कर दिया। पहले तो प्रशासन कहता रहा कि ट्रकों में लदवाने के बाद गोवंशीय पशुओं को चार गोशालाओं में संरक्षित करने के लिए छोड़ दिया गया है। संचालकों व प्रधानों से बचत के लिए पशुओं की फर्जी इंट्री भी कराई गई। जब गोसेवकों को पता चला और मध्य प्रदेश के पहाड़ी खेरा जंगल में दफन जिदा दो मवेशियों को निकलवाया तो इसकी सूचना स्थानीय विधायक राजकरन कबीर को दी। वह खुद मौके पर पहुंचे। मामले में दूसरे दिन बवाल मचा तो प्रशासन बचाव की मुद्रा में आ गया।

बांदा गोवंश प्रकरण : आखिर किसके आदेश पर एआरटीओ ने उपलब्ध कराए दस ट्रक
Banda Govansh Case: After all, on whose orders ARTO provided ten trucks

आनन-फानन सीडीओ और डीएसटीओ को मौके पर जांच को भेजा गया। उनकी जांच आख्या के आधार पर एसडीएम, ईओ, सीवीओ को दोषी मानते हुए शासन को रिपोर्ट भेजी गई। शासन ने ईओ को निलंबित कर दिया। गुरुवार को नरैनी एसडीएम सुरजीत सिंह को जिला मुख्यालय अटैच कर वहां एसडीएम रवींद्र कुमार को नई जिम्मेदारी दी गई है। अब मुख्य पशु चिकित्साधिकारी पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है। लेकिन मौके पर ट्रक उपलब्ध कराने वाले एआरटीओ और सुरक्षा की अनदेखी करने वाली पुलिस पर कोई कार्रवाई की संस्तुति नहीं हुई। मामले की उच्च स्तरीय या न्यायिक जांच की मांग की जा रही है। ताकि पता चले कि आखिर एआरटीओ को ट्रक मुहैया कराने के निर्देश किसने दिए। किसके कहने पर गोवंशीय पशुओं को पहाड़ी खेड़ा जंगल में छोड़ा गया व घायल बेजुबानों को जिदा दफन कर दिया गया।


( शरद मिश्रा- संपादक )
( सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश )

 
 



Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh
 





 

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