– विनोद मिश्रा
बांदा। बुंदेलखंड की दो बड़ी नदियों केन व बेतवा का गठजोड़ यहां के लिए वरदान साबित होगी या अभिशाप।क्योकि इस परियोजना को केंद्र की तत्कालीन अटल बिहारी बाजपेई ने जब मंजूरी दी थी तब से ही इसकी तकनीकी खामियों एवं भौगोलिक परिस्थितियोपर विरोधाभाषी सवाल उठते रहे है।

कल विश्व जल दिवस पर यूपी एवं एमपी के बीच करार हो गया। पीएम मोदी ने कहा की यह योजना बुंदेलखंड के सुनहरे भविष्य की भाग्य रेखा है। हम आज की खबर में सरकारी दावों के रचनात्मक पहलू का उल्लेख कर रहे है। अगली खबर में हम दूसरे पहलू से अवगत करायेगे। परियोजना का रचनात्मकपहलू का दावा यह है की इससे खेतों की प्यास बुझेगी, साथ ही यह प्रोजेक्ट पेयजल संकट मिटाने के भी काम आएगा। अकेले बांदा में करीब दो लाख हेक्टेअर कृषि क्षेत्र के सिंचित होने से खेती में एक नई हरित क्रांति का आगाज हो सकेगा।

केन-बेतवा इंटर लिंक भारत सरकार का महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है। नहर के जरिए दोनो नदियों को आपस में जोड़ दिया जाएगा। परियोजना का मुख्य उद्देश्य बुंदेलखंड में पानी के संकट को दूर करना है। इसकी अनुमानित लागत लगभग 45 हजार करोड़ रुपये है। इससे यूपी-एमपी दोनो राज्यों को पानी मिलेगा। बुंदेलखंड कृषि प्रधान क्षेत्र है। यहां अभी भी ज्यादातर किसान बारिश के भरोसे खेती कर रहे हैं। लेकिन इस प्रोजेक्ट से सूखे का संकट दूर होगा। बांदा में सिचाई के लिए एक लाख 93 हजार 479 हेक्टेअर कृषि क्षेत्र प्रस्तावित है। जिसमें खरीफ रबी व जायद तीनों को शामिल किया गया है। इसमें करीब 25 हजार हेक्टेअर माइक्रो एरीगेशन को मिलेगा। जिले का व्यावसायिक ताना-बाना खेती पर आधारित है। सिचाई की मार से पिछड़ रही खेती को केन-बेतवा लिक परियोजना से एक नई ताकत मिलेगी। -केन-बेतवा लिक परियोजना भारत सरकार का महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है। चित्रकूटधाम मंडल के बांदा व महोबा जिले में करीब सवा दो लाख हेक्टेअर क्षेत्रफल सिचाई के लिए प्रस्तावित है। -धीरज कुमार, अधीक्षण अभियंता, सिंचाई विभाग

फसलवार सिचाई के लिए निर्धारित क्षेत्रफल को देखें तो
रबी में 88 हजार 12 हेक्टेअर
खरीफ में 85 हजार 990 हेक्टेअर,जायद में 19 हजार 477 हेक्टेअर है।

इतना ही नहीं यह भी माना जा रहा है की गर्मी की किसानी को भी पानी मिलेगा । जिले में रबी व खरीफ फसलों की मुख्य रूप से पैदावार होती है। यहां सिचाई के अभाव में गर्मी के दिनों में खेत खाली पड़े रहते हैं जबकि जायद फसलों की बेहद संभावना है और इससे किसान अतिरिक्त आमदनी कर अपनी आय बढ़ा सकते हैं। केन-बेतवा लिक परियोजना में खरीफ व रबी के अलावा गर्मी में पैदा होने वाली जायद फसलों को भी शामिल किया गया है। 19 हजार हेक्टेअर से अधिक क्षेत्रफल को जायद में पानी मिलेगा। निश्चित ही इससे बुंदेली किसानी में हरित क्रांति का एक नया अध्याय जुड़ेगा।चित्रकूटधाम मंडल केअधीक्षण अभियन्ता सिंचाई धीरज कुमार का दावा है की बांदा व महोबा जिले में करीब सवा दो लाख हेक्टेअर क्षेत्रफल सिचाई के लिए प्रस्तावित है।

( शरद मिश्रा- संपादक )
( सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश )




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