- विनोद मिश्रा
बांदा। दो पाटों के बीच में साबुत बचा न कोय,लेकिन यहां का किसान और खेती तीन पाटों में पिस रही है। इससे फसलों पर नुकसान के बादल मंडरा रहे और डरवा रहें हैं। वह कैसे जानिए फसल “पुराण”कैसे पहले सूखा फिर बारिश उसके बाद अति वृष्टि नें किसान को बर्बादी की ओर ढकेल रही हैं।

इस वर्ष मंडल में खरीफ की बुआई और धान की रोपाई के लिए 4,35,504 हेक्टेयर का लक्ष्य था। जुलाई में बारिश न होने से किसान खरीफ बुआई व धान की रोपाई नहीं कर पाए। 15 अगस्त से बारिश शुरू हुई तो किसानों ने किसी प्रकार 3,99,868 हेक्टेयर में अरहर, उर्द, मूंगफली, मूंग, ज्वार, बाजरा आदि की बुआई सहित धान की रोपाई की।

अब 15 सितंबर के बाद भी रिमझिम बारिश से खरीफ की फसल को नुकसान पहुंच रहा है। किसानों का कहना है कि यदि मूंग, उर्द, तिल काट लिया तो धूप न निकलने से सड़ जाएंगे। कमोवेश यही स्थिति सब्जियों की है। किसानों का कहना है कि बारिश से पौधों में निकलने वाले फूल जमीन में गिर जाते हैं। इससे पौधों में फल नहीं लग पा रहे हैं। जल भराव से पालक, धनिया, तरोई, लौकी, करैला आदि पौध चौपट हो रहे हैं। मौसम साफ नहीं हुआ तो उत्पादन पर 50 फीसदी से अधिक का नुकसान होगा। हालांकि धान की फसल को कोई नुकसान नहीं है।

चार दिन पूर्व जिले में लगभग आठ मिलीमीटर बारिश रिकार्ड की गई है, जबकि पिछले 15 दिनों में 101 मिमी बारिश हुई है। जो सितंबर माह की औसत बारिश 157.10 मिमी से 56 मिमी कम है, जबकि पिछले वर्ष सितंबर में 99.93 मिमी हुई थी। इसके पहले वर्ष 2019 में 307 मिमी बारिश हुई थी।
– पूरे सितंबर बारिश के आसार
कृषि विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक दिनेश शाहा का कहना है कि मानसून देर से आने के कारण पूरे सितंबर में बारिश के आसार हैं। किसानों को पहले ही चेताया गया था कि वह कम पानी वाली फसलों को बोएं।

( शरद मिश्रा- संपादक )
( सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश )



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