- विनोद मिश्रा
बांदा। राजकीय मेडिकल काॅलेज में प्राण वायु प्लांट टेक्नालाॅजी पर आधारित आक्सीजन जनरेशन प्लांट की टेस्टिंग जिलाधिकारी आनन्द कुमार सिंह के समक्ष की गयी।

प्राचार्य मुकेश यादव नें डीएम को बताया की प्लांट पीएसए टेक्नालाॅजी पर आधारित है। कम्पनी द्वारा बताया गया कि 93 प्रतिशत शुद्धता की आक्सीजन मरीजो के लिये सुरक्षित है। गाइडलाइन के अनुसार 48 से 72 घण्टे की टेस्टिंग की जायेगी। क्षमता 60 क्यूबिक मी0/घण्टा है। 24 घण्टे में 1440 क्यूबिक मी0 आक्सीजन तैयार होगी।

आक्सीजन प्लांट से सेन्ट्रल आक्सीजन पाइप के माध्यम से मराजों की आवश्यकतानुसार बेडो तक आॅक्सीजन पहुंचेगी।प्लांट से 24 घण्टें में डी टाइप से लगभग 200 सिलेण्डर पृथक से भरकर स्टोर हो सकते है,ताकि भविष्य मेें यदि प्लांट में तकनीकी खराबी आयेगी तो इमरजेंसी में भरे हुए सिलेण्डरो का प्रयोग किया जायेगा।

वर्तमान में मेडिकल कालेज में 1000 डी टाइप के सिलेण्डर उपलब्ध है। मरीजो के आॅपरेशन के समय आक्सीजन सिलेण्डरो के माध्यम से प्रयोग किया जाता था परन्तु प्लांट क्रियाशील होने के बाद आक्सीजन पाइप लाइन के माध्यम से मिलेगी जिससे आपॅरेशन में आसानी होगी। मैनपावर की आवश्यकता कम होगी।आक्सीजन न मिलने से होने वाली मृत्यु दर में कमी आयेगी।

( शरद मिश्रा- संपादक )
( सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश )



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