- विनोद मिश्रा
बांदा। सर्वोच्च अदालतों और एनजीटी के आदेशों के नदियों और खदानों में हो रहे उल्लंघन के बीच खनिज विभाग अपने खजाने में चार अरब रुपये जुटाने की जीतोड़ कोशिशें कर रहा है। यह भारी भरकम लक्ष्य शासन ने तय कर रखा है। पिछले आंकड़े इसके गवाह हैं कि अवैध खनन और ओवर लोडिंग के बीच खनिज विभाग अपना लक्ष्य पूरा कर लेता है।
खनिज विभाग को इस वर्ष राजस्व के रूप में 40 हजार लाख (चार अरब) रुपये जुटाने हैं। शासन लगभग हर साल यहां का लक्ष्य बढ़ाता जा रहा है। पिछले साल 34000 लाख रुपये का लक्ष्य दिया गया था। अबकी इसे बढ़ाकर 40 हजार लाख रुपये कर दिया गया है। खनिज विभाग बालू और पत्थर की खदानों से रायल्टी के रूप में भारी भरकम राजस्व वसूलता है।
इसके अलावा अवैध खनन और ओवर लोडिंग आदि की कुछ कार्रवाइयां करके जुर्माना के रूप में भी कुछ करोड़ वसूल लेता है। महंगी रायल्टी और तमाम अवैध वसूलियों की अदायगी पर खर्च हो रही रकम की भरपाई के लिए पट्टाधारक जमकर अवैध खनन कर रहे हैं। सख्त रोक के बाद भी नदियों की जलधारा में मशीनें उतारकर खनन किया जा रहा है।
खदान संचालक हर माह एडवांस के रूप में रायल्टी जमा करते हैं। जिले में लगभग दो दर्जन प्रमुख खदानें हैं। मौजूदा में सिर्फ डेढ़ दर्जन ही चल रहीं हैं। शेष बंद हो चुकी हैं।
पांच वर्ष का पट्टा लेकर कई कंपनियों/पट्टाधारकों ने पोकलैंड, लिफ्टर और जेसीबी आदि मशीनों से दो-तीन वर्षों में ही खदानें खोखली कर दीं। बालू खत्म होने पर खदानें छोड़ दीं। ऐसी कई खदानों की जमा सिक्योरिटी राशि जब्त की गई है। भाग खड़ी हुई कंपनियां रायल्टी का करोड़ों रुपये दबाए हुए हैं।
खनिज विभाग ने चालू वर्ष 2021-22 में निर्धारित लक्ष्य चार अरब के सापेक्ष मई माह तक 38 करोड़ 80 लाख रुपये से ज्यादा जुटाएं हैं। यह लगभग 10 फीसदी है, जबकि इस माह में लक्ष्य तीन हजार लाख रुपये का था। पिछले वर्ष इसी माह लक्ष्य का 120 फीसदी से अधिक का राजस्व जुटाया था।
अगले माह से चलेगा डंप का खेल
एनजीटी की शर्तों के तहत पहली जुलाई से खदानों में खनन बंद हो जाएगा। तीन माह बाद यह पहली अक्तूबर से फिर शुरू होगा। खनन के लिए सिर्फ नौ दिन शेष हैं। मौजूदा समय में जनपद में अमलोर, मरौली, बेंदा खादर, जौहरपुर, कनवारा, अछरौंड़, बिल्हरका आदि करीब 15 खदानें चल रही हैं।
रात-दिन युद्धस्तर पर खनन हो रहा है। बड़ी मात्रा में बालू डंप भी की जा रही है। खदानों की बंदी के दिनों में यह डंप बालू आसमान छूते भावों में बिकेगी। साथ ही डंप की आड़ में खदानों में उस वक्त तक खनन चलेगा, जब तक बारिश से रास्ते बंद न हो जाएं या बाढ़ में खदान डूब न जाए।
खदानों की बंदी के समय बने सचल दल
अब जबकि नौ दिनों बाद सभी खदानें तीन माह के लिए बंद हो रहीं हैं, तब जिला प्रशासन ने ओवर लोडिंग और वैध रायल्टी रवन्ना की जांच के लिए सचल दल गठित किए हैं। सरकारी विज्ञप्ति में बताया गया कि जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने बांदा शहर के चिल्ला चौराहा और तिंदवारी क्षेत्र के बेंदाघाट पुलिस चौकी के पास सचल दल तैनात किया है।
इस जांच दल में खनिज, राजस्व, परिवहन, वाणिज्य कर और पुलिस विभाग के अधिकारी और कर्मचारी शामिल किए गए हैं। इनकी आठ-आठ घंटे की तीन पालियों में ड्यूटी लगाई गई है। यह 24 घंटे काम करेंगे। सोमवार (21 जून) से यह शुरुआत हो गई है।
खनिज प्रभारी एडीएम संतोष बहादुर सिंह का दावा है की शासन द्वारा निर्धारित किया गया खनिज लक्ष्य रायल्टी आदि से पूरा किया जाएगा। इसके लिए लगातार प्रयास चल रहा है। अवैध खनन में किसी तरह की ढील नहीं दी जा रही। आए दिन चेकिंग और सीज व जुर्माना कार्रवाइयां की जा रही हैं।
( शरद मिश्रा- संपादक )
( सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश )
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