
- विनोद मिश्रा
बांदा। “हाय दईया” फसल बीमा के नाम पर “अंधेरगर्दी एवं लूट” है। किसानों का दर्द है की अब जाएं तो जाए कहां ? अपना दुखड़ा कहे तो कहें किससे ? जिले में बीमा के नाम पर लूट अनवरत जारी है। बिना किसी सूचना के बैंक से पैसा कट जाता है।

जिले के प्रगतिशील “किसान प्रेम सिंह जिनका कृषि परचम विदेशों” तक में है वह प्रधान मंत्री “फसल बीमा की गदरशाही के शिकार” हैं। उनका जिस फसल का बीमा किए है, उन्होंने ना तो वह फसल बोई है और ना ही उनसे कोई बीमा के लिये पूछने ही आया।

प्रेम सिंह के गाटा संख्या 330 नंबर में आम का बाग है। जबकि बीमा गेहूं का किया गया है। 86 नंबर में अमरूद का बाग है। इसमें भी गेहूं का बीमा है। 304 नंबर में गेहूं बोया है। जबकि बीमा गेहूं सरसों और चना का किया गया है।

प्रगतिशील किसान प्रेम सिंह कहते हैं की दुखद बात यह है कि बीमा में प्रधानमंत्री शब्द लगा है। किसे बताएं कि बीमा व्यवसाय है। यह कोई उपकार नहीं है। बिना मर्जी के किसानों का बीमा करना लोकतंत्र में तानाशाही है। उन्होंने बताया की यह कई सालों से प्रीमियम प्रतिवर्ष दो बार मेरे खाते से कट जाता है।
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