
- शरद मिश्रा
बांदा। यूरिया खाद की ‘भारी कमी’ ने ‘किसानों की चिंताओं’ को ‘चरम’ पर पहुंचा दिया है। फसल को समय पर यूरिया खाद न मिलने से किसानों की ‘फसलें सूखने के खतरे’ में हैं और उनकी ‘आर्थिक सुरक्षा भी दांव’ पर लगी हुई है। किसानों को एक टोकन पर केवल एक बोरी खाद दी जा रही है, जबकि उनकी वास्तविक आवश्यकता लगभग पाँच बोरी प्रति किसान है।

किसानों का कहना है कि उन्होंने अपने खेतों में पानी दे दिया है और पानी देने के 2-3 दिन बाद ही यूरिया खाद का छिड़काव जरूरी होता है। खाद की कमी के कारण उनकी फसलें समय पर पोषण नहीं पा रही हैं, जिससे फसल की पैदावार और गुणवत्ता पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

किसानों के अनुसार, स्थानीय बाजारों में भी यूरिया खाद की उपलब्धता मुश्किल हो गई है। जहाँ यह मिल रही है,वहाँ 450 रुपये प्रति बोरी के दोगुने दाम पर है। जसपुरा विकासखंड की रामपुर ग्राम पंचायत सोसाइटी के सचिव राम द्विवेदी ने बताया कि सोसाइटी में केवल 1000 बोरी यूरिया खाद आई थी और 1000 टोकन बांटे गए थे। इस कारण प्रत्येक किसान को केवल ‘एक-एक’ बोरी ही मिली।
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