- विनोद मिश्रा
बांदा । मंडल मुख्यालय की पेयजल योजना प्रशासन और शासन में सूर्पनखा बनकर तहस-नहस हो दम तोड़ दिया।तीन दशक तक प्यास बुझाने के लिए बनाया गए इंतजाम पर अंततःपानी फिर गया। अगले तीस सालों यानी 2050 तक नगरवासियों को करीब 50 एमएलडी पानी की जरूरत होगी। इस खपत को पूरा करने को चिल्ला पेयजल परियोजना का प्रारूप तैयार हुआ था। करीब एक दशक से ज्यादा समय तक फाइल कभी शासन तो कभी कार्यदायी विभाग के बीच घूमती रही। योजना कागजों में ही घूमते अंतत: स्थगित हो गई ।

शहर की जनसंख्या करीब दो लाख है। औसतन करीब 25 से 30 एमएलडी पानी की जरूरत नगर के लोगों को पड़ती है। गर्मी के दिनों में मांग 30 एमएलडी से भी अधिक हो जाती है तब केन नदी से इतना पानी इकट्ठा कर पाना काफी कठिन काम हो जाता है। मौजूदा समय भूरागढ़ स्थित केन नदी के बांबेश्वर व भूरागढ़ इंटेक वेल से केन का पानी शहर के विभिन्न हिस्सों में पहुंचाया जा रहा है।

साल दर साल बढ़ती मांग व गर्मी के दिनों में केन नदी में घटते जल स्तर को देखते हुए दस से 12 वर्ष पहले जल निगम द्वारा चिल्ला पेयजल परियोजना का खाका तैयार किया गया। इस परियोजना के द्वारा चिल्ला स्थित यमुना और केन के संगम से बांदा शहर को पानी की आपूर्ति होनी थी। इस पेयजल परियोजना की क्षमता 50 एमएलडी की रखी गई थी ताकि अगले तीन दशक तक शहर की मांग के अनुरूप आपूर्ति बराबर की जा सके। कार्यदायी विभाग जल निगम व पेयजल आपूर्ति करने वाले जल संस्थान का मानना है कि वर्ष 2050 तक शहर में पानी की मांग 50 एमएलडी तक पहुंच जाएगी। इतना पानी चिल्ला में केन व यमुना के संगम स्थल से ही मिल पाएगा।

विभागीय जानकारी के मुताबिक हाल के वर्षों में करीब दो अरब की लागत से चिल्ला पेयजल परियोजना का प्रस्ताव शासन स्तर को भेजा गया था। जो काफी समय तक लंबित रहा। बताते हैं कि पिछले वर्ष इस परियोजना को स्थगित कर दिया गया है। इसकी जगह केन नदी के भूरागढ़ स्थित दोनो इंटेक वेल में चैनल निर्माण कर पानी आपूर्ति की क्षमता बढ़ाई जा रही है
चिल्ला पेयजल परियोजना में चिल्ला से लेकर शहर तक पाइप लाइन से पानी की आपूर्ति किया जाना प्रस्तावित था। विभागीय जानकारी के मुताबिक चिल्ला से बांदा तक करीब 40 किमी. मेन पाइपलाइन वहीं शहर के अंदर लगभग 60 किमी. पानी आपूर्ति की पाइप लाइन का जाल बिछाया जाना था। शहर की नई बस्तियों में प्राथमिकता के आधार पर पाइप लाइन बिछाने का प्लान रखा गया था। चिल्ला में इंटेकवेल बनाकर मवई में पांडस तक पानी लाकर उसका शोधन कर शहर को आपूर्ति होनी थी।

चिल्ला पेयजल परियोजना को स्थगित किए जाने के बाद भूरागढ़ स्थित केन नदी के दोनो इंटेक वेल में चैनल का निर्माण कराया जा रहा है। कार्यदायी विभाग जल निगम का कहना है कि नदी के अंदर छोटी नहर बनाकर उसे केन नदी की मुख्यधारा से जोड़ा जाएगा। उसी नहर से दोनो बांबेश्वर व भूरागढ़ इंटेकवेल तक पानी पहुंचाने का काम होगा। इसी से पेयजल की क्षमता बढ़ाई जाएगी। साथ ही कुछ स्थानों में टैंक न भर पाने की जो समस्या है उससे निजात मिल जाएगी। हालांकि सरकार ने हर घर नल योजना शुरू की है, जिससे लोगों की प्यास बुझेगी। इसका काम युद्ध स्तर पर चल रहा है। खटान से बबेरू, कमासिन, नरैनी व अतर्रा क्षेत्र को पानी मिलेगा, वहीं अमलीकौर से जसपुरा, बड़ोखर, तिदवारी व मटौंध क्षेत्र के लोगों को पानी मिलेगा। यह दोनों योजनाएं यमुना नदी से पानी लेकर आपूर्ति करेंगी । अधिशासी अभियंता गौरव चौधरी का कहना है की शासनस्तर से यह योजना स्थगित हो गई है। केन नदी में चैनल बनाए जा रहे हैं, जिससे बांबेश्वर व भूरागढ़ इंटेक वेल में पर्याप्त पानी मिलने लगेगा।

( शरद मिश्रा- संपादक )
( सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश )




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