- विनोद मिश्रा
बांदा। जिले में सरकारी नलकूपों से सिंचाई व्यवस्था ध्वस्त है। आप सब को जानकर यह आश्चर्य होगा की लगभग दो अरब रुपये की लागत से जनपद में लगाए गए 656 सरकारी नलकूपों से 65 हजार हेक्टेयर भूमि की सिंचाई का सरकारी मंसूबा पूरा नहीं हो पा रहा। तेजी से गिरे भूजल स्तर और नलकूपों के रखरखाव में लापरवाही से बमुश्किल 25 फीसदी नलकूप ही पर्याप्त मात्रा में पानी दे रहे हैं।

इससे ज्यादातर की क्षमता 50 फीसदी घट गई है। जिले के 25 नलकूप फेल हो चुके हैं, जबकि 22 नलकूप कई तकनीकी खराबियों से बंद हैं। नलकूप विभाग के अनुसार, एक नलकूप से 100 हेक्टेयर क्षेत्रफल सिंचित होने का मानक है। अधिकांश किसान प्राइवेट नलकूपों से कीमत देकर सिंचाई के लिए पानी खरीदते हैं। जहां प्राइवेट नलकूप नहीं हैं वहां की फसल बारिश के भरोसे रह गई है। उधर, जिलेभर के सरकारी नलकूपों की बदहाल स्थित से किसान पूरी तरह से मायूस हैं। किसानों का कहना है कि महंगी सिंचाई से उनकी फसल की लागत भी काफी ज्यादा आ रही है। साथ ही सरकारी महकमे द्वारा नलकूपों को ठीक न कराने से स्थित और भी विकट हो रखी है। किसानों ने संबंधित विभाग और जिला प्रशासन ने खराब सरकारी नलकूपों को शीघ्र ही सही कराने की मांग की है।

अधिशासी अभियंता नलकूप ज्ञानेश कुमार का कहना है की भूजल स्तर गिरने से नलकूपों की क्षमता दिन-प्रतिदिन घट रही है। कम भूजल स्तर पर मोटर पर लोड पड़ता है। इससे अक्सर मोटर फुंक रही हैं। बीते साल 1139 बार नलकूपों की यांत्रिक गड़बड़ी ठीक कराई गई थी। मेंटीनेंस के लिए प्रति नलकूप 38 हजार रुपये मिलते हैं। विभाग के पास 17 में मात्र दो मिस्त्री हैं। ऐसे में रिपेयरिंग का काम प्राइवेट मिस्त्रियों से कराया जाता है।

( शरद मिश्रा- संपादक )
( सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश )




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