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October 14, 2026
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चित्रकूट मंडल में "ठांय-ठांय" और "धाँय-धाँय" हुआ बेदम: खत्म' हुआ 'हथियारों' का 'जुनून'
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चित्रकूट मंडल में “ठांय-ठांय” और “धाँय-धाँय” हुआ बेदम: खत्म’ हुआ ‘हथियारों’ का ‘जुनून’

विनोद कुमार मिश्रा ( सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश )

  • विनोद मिश्रा

बांदा। जिस ‘चित्रकूट मंडल’ की पहचान कभी ‘डकैतों की गोलियों की गूंज’ और आम जनता के ‘हथियारों की सनक’ से होती थी, वहां अब ‘बंदूकें खामोश’ हैं और दुकानों में धूल फांक रही हैं। डकैतों के खात्मे के बाद अब वो ज़माना खत्म हो गया, जब बंदूकें सुरक्षा, रौब और रुतबे की पहचान हुआ करती थीं। अब तो आलम ये है कि 2000 से अधिक लाइसेंसी शस्त्र वर्षों से दुकानों में पड़े-पड़े जंग खा रहे हैं, और वारिसान उन्हें लेने में भी कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहे। एक वक्त था, जब बांदा और आस-पास के जिलों में शस्त्र रखना सामाजिक हैसियत का प्रतीक हुआ करता था। लाइसेंस के लिए सिफारिशें, पैसे और रसूख झोंके जाते थे।

चित्रकूट मंडल में "ठांय-ठांय" और "धाँय-धाँय" हुआ बेदम: खत्म' हुआ 'हथियारों' का 'जुनून'

लेकिन अब न डकैत बचे हैं, न ज़ रूरत और सबसे बड़ा बदलाव ये कि खुद प्रशासन अब इन हथियारों को खत्म करने की तैयारी में है। वारिसान से सहमति ली जा रही है और शासन से अनुमति मिलते ही इन हथियारों को नष्ट कर दिया जाएगा। चित्रकूट मंडल कभी दस्यु आतंक से कांपता था। घरों में शस्त्र रखना मजबूरी थी। लेकिन  ठोकिया, ददुआ, गुड्डन जैसे कुख्यात डकैतों के खात्मे के साथ ही शांति लौट आई। इसी के साथ, हथियारों की ज़रूरत और धौंस का युग भी पीछे छूट गया।

चित्रकूट मंडल में "ठांय-ठांय" और "धाँय-धाँय" हुआ बेदम: खत्म' हुआ 'हथियारों' का 'जुनून'

प्रशासन के आंकड़े बताते हैं कि 2015 तक बांदा जिले में 10,880 शस्त्र लाइसेंस जारी किए गए थे। लेकिन पिछले 9 सालों में ये आंकड़ा रसातल में जा गिरा सिर्फ 110 लाइसेंस बने, जिनमें से 85 वरासत के आदेश पर और 25 आपात परिस्थिति में। प्रक्रिया की जटिलता, शासन के कड़े नियम, हर्ष फायरिंग पर प्रतिबंध, चुनावों के समय शस्त्र जमा कराने की बाध्यता, और पुलिस की बढ़ी सक्रियता ये सब वजहें हैं कि अब लोग हथियारों से दूरी बना रहे हैं। यहां तक कि कई वारिस कह चुके हैं, “अब शस्त्र नहीं चाहिए, अब डर नहीं लगता और लाइसेंस की प्रक्रिया बेहद पेचीदा है।”

चित्रकूट मंडल में "ठांय-ठांय" और "धाँय-धाँय" हुआ बेदम: खत्म' हुआ 'हथियारों' का 'जुनून'

जिला प्रशासन ने ऐसे हजारों शस्त्रों की सूची तैयार की है, जो दुकानों में वर्षो से पड़े हैं। वारिसों को नोटिस भेजकर सहमति ली जा रही है और फिर शासन से अनुमति लेकर इन्हें औपचारिक रूप से नष्ट किया जाएगा। यह सिर्फ एक कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि चित्रकूट मंडल में एक नए युग की शुरुआत का संकेत है जहां रिवाल्वर नहीं, विश्वास और विकास की भाषा बोली जा रही है। अब बुंदेलखंड में बंदूक की गूंज नहीं, कलम और कानून की आवाज सुनाई देती है।

 

 

 

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh

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