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August 26, 2026
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बांदा के अस्पताल कभी भी बन सकते है ज्वालामुखी से शमशान घाट, राम भरोसे है सब हाल !
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बांदा के अस्पताल कभी भी बन सकते है ज्वाला मुखी से शमशान घाट : राम भरोसे है सब हाल !

 

विनोद कुमार मिश्रा ( सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश )

  • विनोद मिश्रा

बांदा। भगवान करें अस्पतालों में अग्नि देवता अपनी कृपा बनाये रखें अन्यथा किन्ही तकनीकी कारणों से उनका प्रकोप प्रज्वलित हुआ तो अस्पताल शमशान घाट में तब्दील हो सकते है। अब रोना तो यही है की हालात ही विपरीत है। जिला पुरुष और महिला अस्पतालों में आग से निपटने की व्यवस्थाएं जिले में रामभरोसे हैं। जो गिनी चुनी दिखावटी व्यवस्थाएं हैं वह भी मानक के मुताबिक नहीं हैं। चंद सीज फायर सिलिंडर टांगकर अस्पताल प्रशासन ने आग से बचाव की खाना पुरी की है।

जिला अस्पताल की नहीं बज रही सिटी: मरीज ढाई माह से हैं परेशान

ईश्वर न करे कि अग्निकांड की कोई दुर्घटना हो, वरना अस्पताल प्रशासन की गैर जिम्मेदारी का खामियाजा निर्दोष बच्चों, महिलाओं और पुरुष मरीजों को भुगतना पड़ सकता है। व्यवस्थाएं तो दरकिनार दोनों अस्पतालों ने आज तक फायर ब्रिगेड विभाग से एनओसी तक हासिल नहीं की है। ऐसे में मंडल मुख्यालय के दोनों जिला अस्पतालों की पड़ताल भी लाजमी है। जिला महिला अस्पताल में संचालित एसएनसीयू (सिक न्यू बार्न केयर यूनिट) में 14 वार्मर बेड और 3 फोटो थेरेपी मशीन है। इस यूनिट में रोजाना औसतन 10 से 15 नवजात भर्ती रहते हैं। जिंदगी बचाने के लिए भर्ती किए गए इन नवजात की यूनिट में मात्र एक सीज फायर सिलिंडर है।

बांदा के अस्पताल कभी भी बन सकते है ज्वालामुखी से शमशान घाट, राम भरोसे है सब हाल !

मौका पड़ने पर वह भी चल पाए इसका कोई भरोसा नहीं। यहां तैनात स्टाफ को इसे चलाने की ट्रेनिंग ही नहीं दी गई। उधर, करीब डेढ़ सौ बेड की क्षमता वाले ट्रामा सेंटर और जिला अस्पताल में रोजाना लगभग 80 से 100 मरीज भर्ती रहते हैं। संभावित आग से बचाव के लिए यहां मात्र छह से सात सीज फायर सिलिंडर हैं। वह भी वार्डों के अंदर हैं, जबकि इन्हें बाहर होना चाहिए। जिला अस्पताल के सीएमएस एमडी त्रिपाठी का कहना है कि भूतल में अस्पताल होने से आग का जोखिम कम है। हरेक वार्ड में दो से तीन दरवाजे हैं। अन्य व्यवस्थाएं भी शीघ्र पूरी की जाएंगी।

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मुख्य अग्निशमन अधिकारी ने बताया कि जिला पुरुष और महिला अस्पतालों ने उनके विभाग से एनओसी नहीं हासिल की। कई पत्र भी भेजे गए। हाल ही में उन्होंने स्टाफ से अस्पतालों के सीज फायर सिलिंडर की जांच कराई थी। मानक के मुताबिक, हरेक वार्ड में 10-10 मीटर पर एक सिलिंडर होना चाहिए, लेकिन यह इंतजाम पर्याप्त नहीं हैं। अभियान चलाकर जांच करेंगे और कमी मिलने पर नोटिस देंगे।

 

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh

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